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MP News: वैद्यों की जड़ी-बूटियों, वन और लोकज्ञान का सरकार करवाएगी दस्तावेजीकरण, टीआरआई को दिया जिम्मा

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम्, रीवा, ग्वालियर-चंबल, इंदौर, भोपाल और उज्जैन संभाग के 34 जिलों के 640 जनजातीय वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में नामांकित किया गया। राज्य सरकार द्वारा इन्हें क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण देगी। जून 2026 के अंत तक प्रदेश से 101 ट्राईबल हीलर्स के नाम मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग लेने के लिए केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। अन्य ट्राईबल हीलर्स के चयन की कार्यवाही चल रही है।
शासन ने 34 जिलों के कलेक्टरों और जनजातीय कार्य विभाग के जिलाधिकारियों को ट्राईबल हीलर्स के नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। जिलों से मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षण लेने के लिए ऐसे जनजातीय वैद्यों/चिकित्सकों के नाम मांगे गए हैं, जो अनिवार्यत: अनुसूचित जनजाति समुदाय के हों। इनका अपने समुदाय में स्थापित प्रभाव हो और वे अन्य लोगों को प्रशिक्षित करने की स्थिति में हों। साथ ही ऐसे वैद्यों/चिकित्सकों के नाम भी मांगे गए हैं, जो उपचार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे जड़ी-बूटी चिकित्सा (हीलिंग टू हर्ब्स), अस्थि चिकित्सा (बोन-सेटिंग), प्रसूति कराने (मिडवाईफरी) और सर्पदंश उपचार (स्नेक बाइट) आदि विधाओं में विशेषज्ञता रखते हों।
5 हजार मास्टर ट्रेनर्स का कैडर होगा
राज्य सरकार, प्रदेश के जनजातीय समुदाय के ऐसे वैद्यों की पुराकाल प्राकृतिक और औषधीय वनस्पतियों से जुड़ा देशज का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करने जा रही है। इसमें प्रदेश की जनजातीयों के पास उपलब्ध औषधीय पौधों, खेती-किसानी, वन एवं लोकज्ञान की गूढ़ जानकारियां भी शामिल की गई है, ताकि यह ज्ञान अगली पीढ़ी तक भी पहुंचे। ज्ञात हो कि जनजातीय समुदायों पारम्परिक चिकित्सा ज्ञान के अभिलेखीकरण के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के बीच एमओयू भी है।
इसके तहत ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’ चलाया जा रहा है। इसके तहत देश की जनजातीय समुदायों से जुड़े वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) का 5,000 प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर्स' का कैडर तैयार किया जाना है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे जनजातीय वैद्यों का चयन किया जा रहा है, जो पारम्परिक उपचार पद्धतियों को जानते हैं।
टीआरआई को दी जिम्मेदारी
दस्तावेजीकरण के लिए जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था (टीआरआई-भोपाल) को जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार की इस पहल के अंतर्गत जनजातीय समुदाय के परम्परागत वनवासी वैद्य, तड़वी, भुमका, बरवा, ओझा और गुनिया सहित बुजुर्ग ज्ञानधारकों तक सीधी पहुंच बनाई जा रही है। विशेष रूप से प्राकृतिक कंद-मूल (जड़ी-बूटियों) और औषधीय वनस्पतियों से सामान्य-असामान्य रोगों के अल्पावधि-दीर्घावधि उपचार से संबंधित जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे नैसर्गिक ज्ञान और इनके अनुभवों को अभिलेख रूप में विकसित किया जाएगा।
Created On :   19 Sept 2026 11:25 PM IST











