Chandrapur News: तीन किसानों की जान लेने वाला त्रिशूल आखिरकार पिंजरे में कैद

तीन किसानों की जान लेने वाला त्रिशूल आखिरकार पिंजरे में कैद
  • ट्रैंक्यूलाइज कर किया रेस्क्यू
  • किसानों को मिली दहशत से मुक्ति

Chandrapur News तहसील में तीन किसानों की जान लेने और दहशत फैलाने वाले ‘त्रिशूल’ नामक बाघ को आखिरकार वन विभाग ने पिंजराबंद कर लिया। गदगांव परिसर के उरकुडपार स्थित संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 380 में वन विभाग की विशेष टीम ने यह कार्रवाई की। पशु चिकित्सा अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों, आरआरटी टीम और पुलिस की संयुक्त मुहिम में बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। इससे क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

मंगलवार को चिमूर प्रादेशिक वन परिक्षेत्र के गदगांव बीट अंतर्गत उरकुडपार में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविकांत खोब्रागड़े और पुलिस हवलदार (शूटर) अजय मराठे ने बाघ को बेहोश कर पिंजराबंद किया। करीब पांच वर्ष उम्र के इस बाघ को उपचार और निगरानी के लिए ब्रम्हपुरी स्थित टीटीसी सेंटर भेजा गया है। यह अभियान उपवनसंरक्षक डॉ. कुमार स्वामी एस.आर. और सहायक वनसंरक्षक डॉ. महेश गायकवाड़ के मार्गदर्शन में वनपरिक्षेत्र अधिकारी किशोर देवरकर सहित वन विभाग, ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प की आरआरटी टीम और पुलिस कर्मचारियों ने पूरा किया।

ज्ञात हो कि, 30 अक्टूबर को गरडापार निवासी किसान सदाशिव चिरकुटा (50) पर इसी वन कक्ष में बाघ ने हमला कर उन्हें मार डाला था। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। खेतों में कपास की चुनाई का काम जारी होने से किसानों के सामने खेतों में जाने का संकट खड़ा हो गया था। इससे पहले खडसंगी बफर क्षेत्र में भी बाघ के हमले में दो किसानों की मौत हुई थी। वाहनगांव निवासी शंकर मसराम को 23 अप्रैल और नवेगांव पुनर्वास निवासी राजेंद्र भोयर को 6 जुलाई को बाघ ने अपना शिकार बनाया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को गरडापार के सदाशिव चिरकुटा की मौत हुई। लगातार तीन जानें जाने से बाघ को पकड़ने की मांग तेज हो गई थी।


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