Jabalpur News: मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च, फिर भी आए दिन अंधकार का सामना कर रही जनता, उठ रहे सवाल

मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च, फिर भी आए दिन अंधकार का सामना कर रही जनता, उठ रहे सवाल
रियलिटी: हवाओं के झोंके और जरा सी बारिश में ही गुल हो जाती है बिजली, लोगों ने कहा- सुधार में भी बरती जा रही लापरवाही

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। हर साल मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च होने के बाद भी पहली ही आंधी और बारिश में बिजली के बुनियादी ढांचे पूरी तरह ध्वस्त हो रहे हैं। हाल ही में शहर में आए आंधी-तूफान और प्री-मानसून की बारिश ने बिजली कंपनी के दावों की पोल खोलकर रख दी। शहर में कई क्षेत्रों में आठ से 9 घंटे तक बिजली गुल रही।

ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई जगह दो व तीन दिन बाद सुधार हो पाया। भारी भरकम बिल चुकाने के बाद भी नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने तो यहां तक कहा कि बिजली गुल होने के बाद अफसर फोन तक नहीं उठाते। संबंधित शिकायत नंबर पर भी कोई रिस्पाॅन्स नहीं मिलता।

नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान अक्सर बिजली कटौती, आंधी में हुए नुकसान व सुधार के नाम पर की जाती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में दो-दो दिन तक बिजली सप्लाई चालू ही नहीं हो पा रही। इस व्यवस्था से सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि हकीकत में मेंटेनेंस हुआ है या फिर यह कागजों में ही दर्ज है।

मेंटेनेंस के नाम पर होता है ये खेल

जानकार सूत्रों का कहना है कि प्री-मानसून मेंटेनेंस पर हर साल मई-जून में पेड़ों की छंटाई के लिए घंटों का शटडाउन लिया जाता है। शटडाउन के दौरान मैदानी अमला केवल मुख्य रास्तों पर दिखावे की ट्रिपिंग करता है। अंदरूनी कॉलोनी में पेड़ों की डालियां तारों को छूती रहती हैं, जो तेज हवा के चलते तारों पर गिर जाती हैं और इंसुलेटर, फ्लैश ओवर (शॉर्ट सर्किट) का कारण बनती है।

132 केवी और 33 केवी मुख्य सब-स्टेशन व विनोबा भावे सब-स्टेशन, माढ़ोताल जैसे बड़े फीडरों की सप्लाई में आंधी के कारण फॉल्ट आता है, तो एक साथ ही पूरे शहर में अंधकार छा जाता है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के सब-स्टेशनों व फीडरों, खम्भे, विद्युत तारों में क्षति होने से यहां के अंचल अंधकार मय हो जाते हैं।

इन योजनाओं के तहत मिला करोड़ों का बजट

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत चार संभाग क्रमश: जबलपुर, रीवा, सागर व शहडोल संभाग आते हैं और 21 जिले हैं। इन सभी जिलों के बिजली सिस्टम को अपग्रेड करने के साथ ही जबलपुर जिले को भी अपग्रेड करने के लिए फीडर सेपरेशन, सौभाग्य योजना, अटल गृह ज्योति योजना, आईपीडीएस व आरडीएसएस योजना के तहत करोड़ों का बजट मिला। उसके बाद भी बिजली सिस्टम पूर्व की तरह है। करोड़ों की राशि से कहां विकास हुआ है यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।

}सौभाग्य योजना 16320 करोड़ रुपए

}अटल गृह ज्योति योजना 6033 करोड़ रुपए

}आरडीएसएस योजना 9466 करोड़ रुपए

}आईपीडीएस योजना 15161 करोड़ रुपए

यह भी एक कारण

बिजली के जानकारों का कहना है कि सुरक्षा रिले और अर्थिंग सिस्टम सही न होने से फाॅल्ट बड़ा रूप ले लेता है। जबलपुर के पुराने और नए रिहायशी इलाकों में आज भी खुले एल्युमिनियम के तारों का ही इस्तेमाल हो रहा है और हवा के तेज थपेड़ों या टहनियों का बोझ वे नहीं संभाल पाते और टूट जाते हैं।

इन्हें आधुनिक अंडरग्राउंड केबलिंग या एबी केबल से अपग्रेड नहीं किया जाता, जबकि करोड़ों की राशि बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में आती है।

योजनाओं के स्वीकृत प्रावधानों के तहत स्वीकृत कार्य लगातार किए जा रहे हैं, जिसमें निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम परिलक्षित होंगे।

- संजय भागवतकर, मुख्य महाप्रबंधक

हर माह करोड़ों वसूली, सुविधा कुछ नहीं

जानकारों के अनुसार जबलपुर जिले में 3 लाख 90 हजार विद्युत उपभोक्ता हैं, लेकिन इन उपभोक्ताओं को रोजाना 24 घंटे बिजली आज तक नहीं मिली। खास तौर पर प्री-मानसून के दौरान तो घंटों भीषण गर्मी में अघोषित कटौती की मार झेलनी पड़ती है। इन उपभोक्ताओं से प्रति माह बिजली बिल के रूप में राजस्व 75 करोड़ रुपए तक वसूला जाता है पर सुविधा न के बराबर है।

Created On :   19 Jun 2026 3:45 PM IST

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