Latur News: फिर हिली मराठवाड़ा की धरती, हिंगोली में दो झटके; अहमदपुर तक महसूस हुए कंपन

फिर हिली मराठवाड़ा की धरती, हिंगोली में दो झटके; अहमदपुर तक महसूस हुए कंपन
  • सुबह 7.46 और 9.43 बजे 3.3 व 4.5 तीव्रता के भूकंप से दहशत
  • 4.5 तीव्रता का झटका महज 5 किमी गहराई पर, कुछ स्थानों पर घरों से बाहर निकले लोग
  • 2026 में कई बार कांपी हिंगोली की धरती, प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की

Latur News मराठवाड़ा में एक बार फिर धरती हिली। शनिवार सुबह हिंगोली जिले में कुछ ही घंटों के अंतराल में भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। इनका असर नांदेड जिले के साथ लातूर जिले के अहमदपुर के कुछ हिस्सों में भी महसूस हुआ। अचानक धरती कांपने और कंपन महसूस होने से नागरिकों में दहशत फैल गई। हालांकि, प्राथमिक जानकारी के अनुसार कहीं भी जनहानि या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार सुबह 9.43 बजे हिंगोली में 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसकी गहराई महज 5 किलोमीटर थी। इसका केंद्र 19.555 अक्षांश और 77.229 देशांतर के आसपास दर्ज हुआ। इससे पहले सुबह 7.46 बजे 3.3 तीव्रता का झटका महसूस किया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार दोनों झटकों का केंद्र हिंगोली जिले के क्षेत्र में रहा। कंपन महसूस होने पर कुछ स्थानों पर लोग घरों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने फिलहाल स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी है।

छह महीने में कई बार कांपी हिंगोली की धरती

हिंगोली क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां नई नहीं हैं। इस साल 11 अप्रैल को हिंगोली में 4.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। एनसीएस के अनुसार इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। 9 जुलाई को भी हिंगोली में 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था। इसके बाद उसी क्षेत्र में 3.9, 3.6 और 4.1 तीव्रता के अन्य झटके भी दर्ज किए गए। 11 जुलाई को 3.5 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज हुआ। यानी अप्रैल से अक्टूबर के बीच हिंगोली क्षेत्र में 4.0 से अधिक तीव्रता के कई झटके दर्ज हो चुके हैं। शनिवार के 4.5 तीव्रता वाले झटके ने एक बार फिर इस क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधि को चर्चा में ला दिया है।

1993 का किल्लारी भूकंप आज भी जेहन में

लातूर जिले में भूकंप का नाम आते ही 30 सितंबर 1993 की वह भयावह रात याद आती है। किल्लारी केंद्रित इस भूकंप की तीव्रता लगभग 6.4 मापी गई थी। आईआईटी कानपुर के नेशनल इंफॉर्मेशन सेंटर ऑफ अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के अनुसार यह भूकंप किल्लारी के आसपास केंद्रित था और इसकी गहराई लगभग 5 किलोमीटर थी।

महाराष्ट्र के भूजल सर्वेक्षण एवं विकास यंत्रणा (जीएसडीए) के अनुसार 1993 की इस आपदा में औसा और निलंगा तहसील का क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुआ तथा 67 गांव भूकंप से प्रभावित हुए थे। इसके बाद पूरे लातूर जिले को भूकंपप्रवण जिले के रूप में घोषित किया गया।

प्रशासन की अपील- अफवाहों से बचें, सतर्क रहें

लातूर जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराएं नहीं और सुरक्षित खुले स्थान की ओर जाएं। विशेष रूप से दगड़-मिट्टी से बने पुराने या कमजोर मकानों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने को कहा गया है। पालकमंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले और जिलाधिकारी डॉ. भारत बास्टेवाड ने नागरिकों से अपील की है कि भूकंप को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों पर भरोसा न करें। किसी भी स्थिति में प्रशासन और अधिकृत एजेंसियों की ओर से जारी जानकारी एवं निर्देशों पर ही विश्वास करें।

रखें नजर : शनिवार के 4.5 तीव्रता वाले भूकंप की आधिकारिक एनसीएस रिकॉर्डिंग के अनुसार गहराई 5 किलोमीटर रही। ऐसे में आने वाले समय में किसी भी संभावित आफ्टरशॉक की स्थिति में प्रशासन की सूचनाओं पर नजर रखना जरूरी है।


Created On :   3 Oct 2026 5:33 PM IST

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