संसद में बैक डोर से एंट्री लेने को तैयार पांच दलों के मुखिया - महाराष्ट्र से दो और बिहार से तीन, उच्च सदन में होगा पार्टी अध्यक्षों का जमावड़ा

संसद में बैक डोर से एंट्री लेने को तैयार पांच दलों के मुखिया - महाराष्ट्र से दो और बिहार से तीन, उच्च सदन में होगा पार्टी अध्यक्षों का जमावड़ा
  • रास की तैयारी मेंपवार, नीतीश, नवीन, आठवले और कुशवाहा
  • बैक डोर से एंट्री लेने को तैयार पांच दलों के मुखिया

New Delhi News. अजीत कुमार। राजनीतिक दलों के प्रमुखों पर अपनी पार्टी को चुनाव जिता कर लोकसभा और विधानसभा में अपने नेताओं की आमद दर्ज कराने की महती जिम्मेदारी होती है। लेकिन मौजूदा दौर में पार्टी प्रमुखों की दिलचस्पी संसद में ‘बैक डोर’ से एंट्री लेने में है। पहले राजनीतिक दलों के प्रमुख अमूमन जनता का समर्थन हासिल कर लोकसभा और विधानसभा में अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाते थे, लेकिन यह पहला मौका है जब पांच दलों के मुखिया एक साथ, एक समय में राज्यसभा के रास्ते संसद की दहलीज लांघने जा रहे हैं। दिलचस्प ये कि इसमें विश्व की सबसे बड़े राजनीतिक दल का दावा करने वाली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का भी नाम शुमार है। यह पहला मौका है, जब 16 मार्च को होने जा रहे राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में नितीन नवीन देश की सर्वोच्च पंचायत के उच्च सदन में प्रवेश करने की तैयारी में हैं।

बिहार से तीन, महाराष्ट्र से दो दलों के प्रमुख

इस चुनाव में जिन राजनीतिक पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने राज्यसभा में पहुंचने के लिए नामांकन दाखिल किया है, उनमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, राकांपा (शरद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले का नाम शुमार है। इनमें नीतीश कुमार, नितीन नवीन और उपेन्द्र कुशवाहा ने बिहार से नामांकन किया है तो पवार और आठवले ने महाराष्ट्र से खाली हो रही सीटों पर पर्चा भरा है। नितीन नवीन विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली भाजपा के सर्वेसर्वा हैं तो वहीं नीतीश लगभग पिछले दो दशक से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं। उपेन्द्र कुशवाहा और रामदास आठवले ऐसे पार्टी प्रमुख हैं, जिनका लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं हैं, लेकिन केन्द्रीय मंत्री आठवले लगातार तीसरी बार तो कुशवाहा लगातार दूसरी बार राज्यसभा में पहुंचेंगे। शरद पवार की पार्टी राकांपा (पवार) की लोकसभा में 8 सीटें हैं, लेकिन अगर वे राज्यसभा में पहुंचते हैं, तो उच्च सदन में वे अपनी पार्टी के इकलौते सदस्य होंगे।

खरगे और देवगौड़ा पहले से हैं उच्च सदन में

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व प्रधानमंत्री व जद (एस) के प्रमुख एचडी देवगौड़ा पहले से राज्यसभा में जमे हुए हैं। मजेदार यह कि खरगे और देवगौड़ा दोनों ही उच्च सदन में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हैं। इतना ही नहीं, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राकांपा (अजित) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी अभी राज्यसभा में हैं।

नेहरू, शास्त्री जैसे नेताओं ने रास जाने से किया परहेज

इतिहास गवाह है कि सियासत के पुराने खिलाड़ियों ने लोकसभा को ही अपनी पहली पसंद बनाया है। चाहे जवाहरलाल नेहरू हों या फिर लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई हों या फिर जगजीवन राम, सभी जनता जनार्दन का आशीर्वाद पाकर लोकसभा में पहुंचे थे और कभी भी राज्यसभा नहीं गए। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जैसे बिरले नेता भी हैं, जो लोकसभा का चुनाव नहीं जीते, लेकिन राज्यसभा में लगातार छह बार पहुंचे। उन्होंने राज्यसभा में रहते सबसे लंबे प्रधानमंत्री कार्यकाल का रिकॉर्ड भी बनाया।

संसद में दिखेंगी पवार फैमिली की तीन पीढ़ियां

पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद पवार और राकांपा (अजित) के पार्थ पवार के निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही संसद में पवार फैमिली की तीन पीढ़ियों की आमद तय हो गई है। पार्थ पवार स्व0 अजित पवार के बेटे हैं और रिश्ते में शरद पवार के पोते हैं। शरद और पार्थ राज्यसभा में पहुंच रहे हैं तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले लोकसभा में अपनी पार्टी की नेता हैं।

Created On :   6 March 2026 7:05 PM IST

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