बॉम्बे हाई कोर्ट: केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती, सेशन कोर्ट के दो दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा रद्द

केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती, सेशन कोर्ट के दो दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा रद्द
  • अदालत ने सेशन कोर्ट के दो दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा को किया रद्द
  • केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के दो दोषियों को बरी करते हुए कहा कि केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती है। यह एक तय कानून है कि शक चाहे कितना भी मजबूत हो, शक सबूत की जगह नहीं ले सकता है। आरोपी को शक के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, चाहे शक कितना भी मजबूत क्यों न हो? एक आरोपी को तब तक बेगुनाह माना जाता है, जब तक कि उसे बिना किसी शक के दोषी साबित न कर दिया जाए। अदालत ने मुंबई सेशन कोर्ट के 12 जनवरी 2018 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराने और उन्हें आजीवन कारावास की सजा के आदेश को रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति मनीष पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट की पीठ ने अविनाश भूषण पिंपलकर उर्फ राजू और मुकेश महादेव मुसहर की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि महिला को वारदात वाली रात 12 से 1 बजे आरोपियों के साथ देखा गया था और दूसरे दिन उसकी लाश सुबह 9 बजे मिली। समय का अंतर काफी अधिक था। बीच में किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल ‘लास्ट सीन’ के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा कि ईंट और पत्थर सार्वजनिक स्थान से बरामद हुए। पंच गवाह ‘रूटीन’ पुलिस गवाह थे। आरोपी हथकड़ी में थे। ऐसी स्थिति में किया गया खुलासा स्वेच्छिक नहीं माना जा सकता है। बरामद वस्तुओं को मौके पर सील करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं था। फॉरेंसिक रिपोर्ट को निर्णायक नहीं पाया गया। आरोपियों के कपड़ों पर खून नहीं मिला। जबकि मेडिकल रिपोर्ट अस्पष्ट थी। हत्या का मोटिव सिद्ध नहीं हुआ है। पीठ ने यह भी कहा कि अभियोजन किसी ठोस कारण (मकसद) को साबित नहीं कर पाया। परिस्थितियों की कड़ी पूरी तरह सिद्ध नहीं हुई। केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। अभियोजन आरोपियों का दोष संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। इस लिए सेशन कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द किया गया। दोनों दोषियों को बरी किया जाता है। यदि किसी अन्य मामले में आवश्यक न हों, तो उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया जाता है।

क्या है पूरा मामला

शिकायत करने वाले का केस यह है कि 25 मार्च 2016 को मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम से सुबह करीब 9 बजे सूचना मिली कि दक्षिण मुंबई के पी. डी'मेलो रोड पर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के कंपाउंड के पास एक लाश पड़ी है। मौके पर पहुंची, तो वहा 55 से 60 साल की एक महिला की लाश पड़ी हुई थी। एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने शक के आधार पर अविनाश भूषण पिंपलकर उर्फ राजू और मुकेश महादेव मुसहर को गिरफ्तार किया था।

Created On :   4 March 2026 9:11 PM IST

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