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अनुकंपा नीति का दुरुपयोग: बीएमसी में नौकरी का बड़ा घोटाला उजागर, फर्जी दस्तावेज देकर 28 साल तक करता रहा नौकरी - आरोपी अधिकारी निलंबित

Mumbai News. दिवाकर सिंह. बीएमसी के भीतर एक चौंकाने वाला भर्ती घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां एक कर्मचारी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनुकंपा नियुक्ति नीति का दुरुपयोग कर न सिर्फ नौकरी हासिल की, बल्कि करीब 28 वर्षों तक सिस्टम को धोखा देकर वेतन और अन्य लाभ उठाता रहा। यह मामला तब उजागर हुआ, जब बीएमसी के अनुज्ञापन विभाग में कार्यरत अधिकारी राजेश्री पाटिल द्वारा की गई प्रशासनिक जांच में अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि आरोपी विनय मधुकर जाधव ने वर्ष 1995 में नौकरी पाने के लिए झूठे दस्तावेज, फर्जी शपथपत्र और गलत प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत किए थे। इस मामले में बीएमसी अधिकारी पाटिल की शिकायत पर आजाद मैदान पुलिस ने केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ पूरा खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी के पिता का निधन 1986 में हुआ था, जिसके बाद उसी वर्ष उसके बड़े भाई को अनुकंपा नीति के तहत महानगरपालिका में नौकरी मिल चुकी थी। नियमों के मुताबिक, एक ही परिवार में केवल एक सदस्य को इस योजना का लाभ दिया जा सकता है। इसके बावजूद आरोपी ने 1995 में प्रेफरेंशियल ट्रीटमेंट (पीटी) के तहत आवेदन कर खुद को पात्र दर्शाया और 1 सितंबर 1997 से बीएमसी में नौकरी प्राप्त कर ली। बताया जा रहा है कि उस समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की गहन जांच नहीं की गई, जिसका फायदा उठाकर आरोपी वर्षों तक सिस्टम में बना रहा।
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करीब तीन दशक तक चलता रहा फर्जीवाड़ा
आरोपी ने 1997 से लेकर 3 जनवरी 2026 तक लगातार नौकरी की और वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाओं का लाभ उठाया। इस दौरान उसने विभाग में विभिन्न जिम्मेदारियां भी संभालीं, जिससे यह घोटाला और भी गंभीर बन जाता है।
जांच में खुली पोल, तुरंत निलंबन
जब आंतरिक जांच में दस्तावेजों की सच्चाई सामने आई, तो बीएमसी प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को 3 जनवरी 2026 से निलंबित कर दिया। साथ ही मामले को आपराधिक अपराध मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके बाद आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में 28 अप्रैल 2026 को आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।
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करोड़ों के नुकसान की आशंका
प्रशासन का मानना है कि इतने लंबे समय तक वेतन और अन्य लाभ लेने के कारण महानगरपालिका को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। अब इस नुकसान का आकलन किया जा रहा है। इस घटना ने बीएमसी की भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के सामने आने के बाद अन्य विभागों में भी इसी तरह की नियुक्तियों की जांच शुरू की जा सकती है। इस मामले में फिलहाल पुलिस को आगे की जांच जारी है।
Created On :   4 May 2026 8:17 PM IST
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