बॉम्बे हाई कोर्ट: यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटील के इंग्लैंड जाने का रास्ता साफ, मुंबई अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन को लेकर नाराजगी, जिदगी सिर्फ एक बार मिलती है....

यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटील के इंग्लैंड जाने का रास्ता साफ, मुंबई अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन को लेकर नाराजगी, जिदगी सिर्फ एक बार मिलती है....
  • बीजेपी नेताओं और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट का मामला, राज्य सरकार ने डॉ. पाटील को इंग्लैंड को दी हरी झंडी
  • बीएमसी के 99 हजार से अधिक फेरीवालों में से अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) को लेकर जताई नाराजगी

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीजेपी नेताओं और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटील को इंग्लैंड जाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने उन्हें इंग्लैंड लौटने की हरी झंडी दे दी है। सरकार ने डॉ. पाटील के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया था। न्यायमूर्ति अश्विन भोबे की एकल पीठ के समक्ष डॉ. संग्राम पाटील की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान पाटील और उनके माता-पिता ने पीठ को लिखित आश्वासन दिया कि इंग्लैंड लौटने की इजाजत मिलने के बाद भी वे महाराष्ट्र पुलिस के साथ सहयोग करते रहेंगे। राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने पीठ को बताया कि हमने पाटील का अंडरटेकिंग स्वीकार कर लिया है और हम उनके दिए गए आश्वासन से संतुष्ट हैं। इस गारंटी के आधार पर पाटील के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) में बदलाव किया जाएगा और फिर पाटील इंग्लैंड जा सकेंगे। इससे पहले सरकार ने पाटील के इंग्लैंड जाने का विरोध करते हुए कहा था कि पाटील के खिलाफ जांच पूरी होने में अभी तीन महीने और लगेंगे। अगर उन्हें इंग्लैंड जाने दिया गया, तो वे भारत वापस आएंगे या नहीं। इसके अलावा उनके बारे में कुछ विदेशी एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी गई है। इसे आने में भी चार हफ्ते लगेंगे। इसलिए पाटील को फिलहाल इंग्लैंड जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इस पर पीठ ने पाटील को इतने लंबे समय तक भारत में रखने पर आपत्ति जताई थी।पाटील की इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विसेज में उनकी नौकरी खतरे में है, क्योंकि वह पिछले तीन महीनों से भारत में हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पीठ ने कहा था कि पाटील को अब और यहां रखना सही नहीं होगा। इसके बाद सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि अगर विदेशी एजेंसियों से पाटील पर रिपोर्ट तीन हफ्ता के अंदर नहीं मिलती है, तो उन्हें इंग्लैंड जाने दिया जाएगा।

मुंबई अवैध फेरीवालों का मामला- बीएमसी के 99 हजार से अधिक फेरीवालों में से अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) को लेकर जताई नाराजगी

उधर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) 99 हजार 435 फेरीवालों में से अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि बीएमसी और पुलिस अवैध फेरीवालों के खिलाफ किस आधार पर कार्रवाई कर रही है? अवैध बांग्लादेशी फेरीवालों के खिलाफ की पहचान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? आखिर कब तक बीएमसी पात्र फेरीवालों को पहचान पत्र मुहैया करवाएगी। उसकी अवैध फेरीवारों के खिलाफ कार्रवाई से पात्र फेरीवालों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष स्वत:संज्ञान याचिका और गोरेगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन की दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई हुई। इस दौरान बीएमसी की वकील ने पीठ को बताया कि शहर में हर रोज बीएमसी और पुलिस अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ऐसे फेरीवालों की पहचान की जा रही है, तो कार्रवाई करने के बाद दोबारा अवैध फेरी के धंधे लगा लेते हैं। इस पर पीठ ने बीएमसी के वकील से पूछा कि 99 हजार 435 फेरीवालों में से क्या अवैध फेरीवालों का वेरिफिकेशन (सत्यापन) हुआ है? याचिकाकर्ताओं द्वारा शहर में बांग्लादेशी फेरीवालों के फेरी के धंधे करने की शिकायतें मिली है। बीएमसी याचिकाकर्ताओं और विभिन्न इलाकों के सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से बांग्लादेशियों की पहचान कर पुलिस को जानकारी दे सकती है। पुलिस उनके खिलाफ भारत में अवैध रूप से रहने की कार्रवाई करे। पीठ ने 6 मई को बीएमसी से पात्र फेरीवालों पहचान पत्र जारी करने को लेकर जवाब मांगा है। पीठ ने यह भी कहा कि बीएमसी के बिना सत्यापन के अवैध फेरीवालों के साथ पात्र और स्थानीय वैध फेरीवालों को भी परेशान हो रही है। पीठ ने बीएमसी से पात्र फेरीवालों का सत्यापन कर उन्हें पहचान पत्र देने के लिए जवाब मांगा है। बीएमसी को स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के कार्यान्वयन में तेजी लाने और वेंडिंग को नियमित करने के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) चुनाव के परिणाम घोषित किया जाए। पिछले दिनों पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि 99 हजार 435 फेरीवालों में से पात्र फेरीवालों का सत्यापन किया जाए और वैध फेरीवालों को पहचान पत्र दिया जाए। जो अवैध फेरीवाले हैं, उनके खिलाफ कठोरता से कार्रवाई की जाए। उन्हें रास्तों पर अवैध फेरी के धंधे करने से रोका जाए। पुलिस हरकत से बाज नहीं आने वाले अवैध फेरीवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।पूजा स्थलों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, बाजारों और रेलवे स्टेशनों के 100 से 150 मीटर के दायरे में फेरी-मुक्त क्षेत्रों में फेरी के धंधे करने पर प्रतिबंध है।

जिदगी सिर्फ एक बार मिलती है और पैसा तो आता-जाता रहता है

उधर बॉम्बे हाई कोर्ट ने पकड़ी गई तीन जहाजों पर फंसे 50 नाविकों को रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जिदगी सिर्फ एक बार मिलती है और पैसा तो आता-जाता रहता है। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 9 फरवरी को अवैध तेल ट्रांसफर को लेकर तीनों जहाजों को पकड़ा था और उन्हें मुंबई के येलो गेट पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बाद से ही जहाजों में 50 नाविक फंसे हुए थे और उन्हें पर्याप्त खाना और पानी नहीं मिल रहा था। उन्होंने एक यूनियन के माध्यम से हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कार्पस) याचिका दायर किया। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति हितेन वेनेगावकर की पीठ के समक्ष तीन जहाजों ‘एस्फाल्ट', ‘स्टेलर' और ‘अल जफजिया' के सात नाविकों बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकासपर सुनवाई हुई। इस दौरान पीठ ने जहाज मालिकों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे चालक दल के सदस्यों को महीनों से नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध कराके उनके साथ पालतू जानवरों से भी बुरा व्यवहार कर रहे हैं। पीठ ने उन पर मानव जीवन की बिल्कुल भी परवाह न करने और नाविकों के स्वास्थ्य के बजाय अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। पीठ ने कहा कि आप (जहाज मालिक) कर्मचारियों को रोजाना केवल 300 मिलीलीटर पानी कैसे दे सकते हैं? हमारे घरों में पालतू जानवरों को भी रोजाना इससे अधिक पानी मिलता है। हम मानव जीवन के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे। तीनों जहाज पर फंसे नाविकों ने दायर याचिका में दावा किया कि उनके पास नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध है। तीनों जहाज को तेल और कोयले के अवैध परिवहन के आरोप में मुंबई से लगभग 11 समुद्री मील दूर बीच समुद्र में जब्त कर लिया गया था, जिसके बाद मालिकों ने नाविकों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। नाविकों ने पीठ को बताया कि वे जहाजों पर वापस नहीं जाना चाहते, क्योंकि उन्हें वहां गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है। पीठ ने सभी 50 नाविकों को छोड़ने का आदेश देते हुए कहा कि हम मानव जीवन की रक्षा करेगा, जबकि जहाज मालिक अपने जब्त जहाजों का ख्याल कर सकते हैं। हमें आपके जहाज और नौकाओं से कोई लेना-देना नहीं है। यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के दायरे में नहीं आता है। मालिकों का आचरण ऐसा है कि वे मानव जीवन की कोई अहमियत नहीं समझते। उन्हें केवल अपनी व्यावसायिक गतिविधियों की परवाह है। पीठ ने यह भी कहा कि भोजन और पानी की नाम मात्र की आपूर्ति से नाविकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उसने येलो गेट पुलिस को सभी 50 नाविकों की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करने और उन्हें छोड़ने का निर्देश दिया।

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