Mumbai News: राज्य में एआई 30 दिनों में बनेगी विशेषज्ञ समिति, विधानसभा में फेस रिकग्निशन सिस्टम पर विपक्ष का हंगामा -

राज्य में एआई  30 दिनों में बनेगी विशेषज्ञ समिति, विधानसभा में फेस रिकग्निशन सिस्टम पर विपक्ष का हंगामा    -
यह आम नागरिकों की निजता के लिए भी बड़ा खतरा

Mumbai News राज्य सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि राज्य में एआई के इस्तेमाल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने हेतु 30 दिनों के भीतर विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। एआई लैस स्मार्ट चश्मे और निगरानी उपकरणों के दुरुपयोग को लेकर विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृह राज्यमंत्री (शहर) योगेश कदम ने कहा कि एआई का उपयोग शासन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़वीस ने एआई के उपयोग के लिए एसओपी तैयार करने हेतु विशेषज्ञों की समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

स्मार्ट चश्मे और निगरानी उपकरणों पर होगी सख्ती

राज्यमंत्री कदम ने कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत एआई -सक्षम स्मार्ट चश्मे या अन्य उपकरणों के जरिए किसी की गुप्त रिकॉर्डिंग कर निजता का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का प्रावधान पहले से मौजूद है। उन्होंने बताया कि संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों में तैनात सुरक्षा कर्मियों को ऐसे एआई आधारित उपकरणों की पहचान और उनसे निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

विधानसभा में फेस रिकग्निशन सिस्टम पर विपक्ष के सवाल

चर्चा के दौरान शिवसेना (उद्धव) विधायक आदित्य ठाकरे ने फेस रिकग्निशन सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विधायकों, मंत्रियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना यह सिस्टम कैसे तैयार किया गया। ठाकरे ने सरकार से यह भी पूछा कि फेस रिकग्निशन डेटा कहां स्टोर किया गया है, कौन-सी कंपनी इसका संचालन कर रही है, डेटा सुरक्षा के लिए कौन-कौन से प्राइवेसी प्रोटेक्शन और फायरवॉल लगाए गए हैं। कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि विधानसभा में कभी भी विधायकों का आइरिस स्कैन या बायोमेट्रिक पंजीकरण नहीं हुआ। ऐसे में फेस रिकग्निशन डेटाबेस कैसे तैयार किया गया, यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि केवल तस्वीरों के आधार पर फेस रिकग्निशन डेटा तैयार किया जा सकता है, तो यह आम नागरिकों की निजता के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।

अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का मामला

विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए योगेश कदम ने कहा कि विधानसभा सचिवालय अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए यह मामला सीधे राज्य सरकार के अधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार फेस रिकग्निशन सिस्टम संभवतः विधानसभा में पहले से उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि यह विषय स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है और वही इस पर उचित निर्देश देंगे। यदि स्पीकर जांच के आदेश देते हैं, तो पुलिस मशीनरी जांच करेगी।

Created On :   30 Jun 2026 7:55 PM IST

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