हेल्थ कैंप: गुरमत की रौशनी में मानसिक तनाव से मुक्ति, गुरुद्वारा श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब में आनंदमय जीवन के लिए नि:शुल्क सेवा शिविर

गुरमत की रौशनी में मानसिक तनाव से मुक्ति, गुरुद्वारा श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब में आनंदमय जीवन के लिए नि:शुल्क सेवा शिविर
  • दीपक नगर के गुरुद्वारा में 9 फरवरी से आयोजन
  • मन की नकारात्मक सोच टूटती है
  • मोबाइल से दूर, शांत जगह पर बैठकर सिमरन

Nagpur News. आज के भागदौड़ भरे जीवन में तनाव अब केवल एक समस्या नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। पढ़ाई, नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक दबाव, रिश्तों की उलझनें और भविष्य की चिंता, इन सबके बीच मन का शांत रहना कठिन हो जाता है। लेकिन गुरमत (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं) की रौशनी में कैसे तनाव से मुक्ति पा सकते हैं, इसे लेकर प्रसिद्ध प्रचारक कनाडा के बीबी बलजीत कौर जी खालसा गुरमत के अनुसार जीवन जीने की कला सिखाएंगे। इसके लिए गुरुद्वारा श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब, दीपक नगर, नागपुर में 9 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक “आनंदमय जीवन” विषय पर विशेष निःशुल्क सेवा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन अमृतवेले सुबह 5 बजे से 7 बजे तक चलने वाले इस शिविर में गुरमत विचार, कथा, नाम सिमरन, ध्यान एवं व्यायाम के माध्यम से जीवन को सुखमय बनाने के गुर सिखाए जाएंगे। गुरुद्वारा साहब के मुख्य सेवादार रंजीत सिंह ताक, जसबीर सिंह विरदी, अमरजीत सिंह मांगट सहित संपूर्ण कमेटी ने कैंप का ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने की अपील की है।


तनाव से मिलेगी मुक्ति

गुरमत के अनुसार तनाव से मुक्ति बाहर की परिस्थितियां बदलने से नहीं, बल्कि अंदर की सोच, विश्वास और साधना बदलने से आती है। गुरमत की रौशनी में तनाव से मुक्त रहने का मार्ग बेहद सरल, प्रभावी और आत्मिक है। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य लोगों को डिप्रेशन, चिंता और तनाव से मुक्ति दिलाना, नशे तथा गलत दवाइयों से दूर रखना और क्रोध व चिड़चिड़ेपन पर नियंत्रण पाना है। साथ ही पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने और प्रसन्नचित्त रहने की प्रेरणा दी जाएगी। कार्यक्रम में अमृतवेले की दिनचर्या, आत्म-चिंतन तथा “नर से नारायण” की आध्यात्मिक यात्रा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी, जिससे शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती को नई दिशा मिलेगी। इस निःशुल्क सेवा के लिए पंजीकरण 7 और 8 फरवरी को गुरुद्वारा साहिब में किया जाएगा।


पढ़ाई, नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक दबाव, रिश्तों की उलझनें और भविष्य की चिंता। इन सबके बीच मन का शांत रहना कठिन हो जाता है।

1) तनाव का मूल कारण: “मैं” और “चिंता”

गुरमत के अनुसार तनाव का सबसे बड़ा कारण है—

  • अहंकार और भविष्य की चिंता।
  • हम बार-बार सोचते हैं—
  • मेरे साथ ही ऐसा क्यों?
  • मेरा क्या होगा?
  • लोग क्या कहेंगे?
  • मैं सफल हो पाऊंगा या नहीं?

यह “मैं” का बोझ मन को लगातार भारी बनाता है। गुरमत हमें सिखाती है कि जीवन का नियंत्रण हमारे हाथ में सीमित है, इसलिए हमें अपनी कोशिश करनी है, पर परिणाम का भार नहीं उठाना।

गुरमत का संदेश:

  • “जो होना है वह प्रभु की रज़ा में है।”
  • जब मन “रज़ा” में चलना सीख जाता है, तनाव स्वतः कम होने लगता है।

2) “नाम सिमरन” – मन का सबसे बड़ा उपचार

आज की दुनिया में लोग तनाव के लिए दवा ढूंढते हैं, पर गुरमत कहती है—

  • दवा भी है और दुआ भी नाम।
  • नाम सिमरन मन की भागदौड़ को रोककर उसे स्थिर करता है।

जब हम “वाहेगुरु” का सिमरन करते हैं तो—

  • मन की नकारात्मक सोच टूटती है
  • भीतर आशा और विश्वास बढ़ता है
  • डर कम होता है
  • चित्त शांत होता है

अमृत वेले (सुबह ब्रह्म मुहूर्त) का सिमरन तो मन को पूरे दिन के लिए मजबूत बना देता है।

व्यवहारिक तरीका

  • रोज़ 10–15 मिनट “वाहेगुरु” सिमरन
  • मोबाइल से दूर, शांत जगह पर बैठकर

3) “हुक्म” को मानना – तनाव का आधा इलाज

तनाव तब बढ़ता है जब हम हर चीज़ अपने हिसाब से चाहते हैं।

गुरमत बताती है,

  • हुक्म (परमात्मा का आदेश/नियम) में चलना ही जीवन की शांति है।

जब हम यह समझ लेते हैं कि—

  • हर परिस्थिति के पीछे प्रभु की शिक्षा है
  • हर दुख भी एक संदेश है
  • हर कठिन समय भी गुजरने वाला है
  • तो मन में स्थिरता आती है।

गुरमत का सार:

  • कर्म करो, चिंता छोड़ो।
  • मेहनत करो, पर मन को परिणाम का गुलाम मत बनाओ।

4) “शुक्राना” – तनाव का विरोधी गुण

तनाव हमें हमेशा “कमी” दिखाता है—

  • मेरे पास यह नहीं
  • मेरा जीवन ऐसा नहीं
  • मुझे वो नहीं मिला

लेकिन गुरमत कहती है—

  • शुक्राना करो, तो शांति मिलेगी।

जब हम रोज़ थोड़ा-सा भी धन्यवाद करते हैं

  • मन संतुष्ट होता है
  • शिकायतें कम होती हैं
  • नकारात्मकता कमजोर पड़ती है

रोज़ की आदत:

सोने से पहले 2 मिनट सोचें,

आज मुझे क्या-क्या अच्छा मिला?

और “वाहेगुरु तेरा शुक्र है” कहें।

5) संगत और सेवा – मन की थकान मिटाने का रास्ता

  • तनाव का एक बड़ा कारण है अकेलापन और मन की घुटन।
  • गुरमत में इसका समाधान है

साध संगत

जहां नाम, कीर्तन, विचार और सकारात्मक माहौल मिलता है।

संगत से,

  • मन को सहारा मिलता है
  • गलत संगति से दूरी बनती है
  • आत्मविश्वास बढ़ता है

सेवा

सेवा मन की सबसे बड़ी थेरेपी है।

जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो,

  • मन हल्का होता है
  • अहंकार कम होता है
  • अंदर खुशी पैदा होती है

6. गुरबाणी का सहारा – आत्मा की शक्ति

  • जब मन टूटता है, तब केवल प्रेरणा नहीं, आत्मिक बल चाहिए।
  • गुरबाणी वही बल देती है।

रोज़ थोड़ा-सा पाठ भी बड़ा प्रभाव डालता है:

  • जपुजी साहिब
  • सुखमनी साहिब
  • रहरास साहिब

गुरबाणी सुनने और पढ़ने से—

  • मन के डर कम होते हैं
  • विचार शुद्ध होते हैं
  • आत्मा में हिम्मत आती है

गुरमत में तनाव का इलाज “मन की दिशा बदलना” माना गया है। अगर मन को गुरमत की रौशनी मिल जाए, तो सबसे कठिन समय में भी इंसान चढ़दीकला में रह सकता है।

Created On :   1 Feb 2026 7:18 PM IST

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