Nagpur News: साल भर में रोके 13 बाल विवाह, 5 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज

साल भर में रोके 13 बाल विवाह, 5 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज
परंपरा की जड़ें इतनी मजबूत कि, कुछ समुदाय मानने के लिए तैयार नहीं

Nagpur News भारतीय समाज में बाल विवाह की परंपरा की जड़ें इतनी मजबूत है कि, कानून ने विवाह की उम्र निर्धारित करने पर भी कुछ समुदाय उसे मानने के लिए तैयार नहीं है। विवाह की उम्र होने से पहले ही बाल विवाह रचाए जा रहे हैं। नागपुर जिले में बाल विवाह रोकने के पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि, बाल विवाह प्रतिबंधक कानून बनने के बाद भी समाज की मानसिकता में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। जिला बाल संरक्षण विभाग की सतर्कता से पांच साल में 45 बाल विवाह होने से बच गए। साल 2025 की बात करें, तो 13 बाल विवाह रोके गए। उनमें से 5 प्रकरणों में फौजदारी गुनाह दर्ज हुए।

विवाह में शामिल होना आफत मोल लेना : बाल विवाह में सहभागी होने से पहले दूल्हा-दुल्हन की उम्र जानना जरूरी है। बाल विवाह में सहभागी होना आफत मोल लेने के बराबर है। विवाह में सहभागी होने वाले लाख कहते रहें कि, उन्हें दूल्हा-दुल्हन की उम्र के बारे में पता नहीं था। कानून के सामने उनकी कोई सुनवाई नहीं है। विवाह में सहभागी होने वाले सभी को बराबरी का गुनाहगार माना जाता है।

लड़के की 21, लड़की की उम्र 18 अनिवार्य : विवाह के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल पूरी होना अनिवार्य है। उससे पहले विवाह रचाना कानूनन गुनाह है। नियम-कानून को धता बताकर विवाह रचाने पर लड़के-लड़की के माता-पिता, रिश्ता जोड़ने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति, मंडप-डेकोरेशन का मालिक, बैंड-बाजा वाले, घोड़ी मालिक, भोजन व्यवस्था में रसोइया, विवाह में सहभागी बाराती सभी को बाल विवाह के लिए दोषी मानकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

शहरों की भी बराबर की भागीदारी : आप अगर से सोचते हैं कि, बाल विवाह ग्रामीण क्षेत्र में होते हैं, तो आप गलत हैं। नागपुर जिले में रोके गए आधे से ज्यादा बाल विवाह नागपुर शहर तथा आस-पास के इलाकों के हैं। ग्रामीण क्षेत्र में काटोल तहसील बाल विवाह के मामले में सबसे आगे हैं। तहसील में स्थलांतरित एक समुदाय में बाल विवाह की बरसों से चली आई परंपरा आज भी कायम है। उस एक ही समुदाय के सर्वाधिक बाल विवाह रोके जाने की जानकारी सामने आई है।

जिला बाल विवाह मुक्त करने जनजागरण : बाल विवाह प्रतिबंधक कानून से नागरिकों को अवगत कराने जनजागरण किया जा रहा है। राज्य के स्कूल, कॉलेज तथा विविध विभागों में जनजागरण अभियान चलाकर जिले को बाल विवाह मुक्त करने का प्रयास है। -सुनील मेसरे, जिला महिला व बाल विकास अधिकारी

विवाह में शामिल सभी गुनाहगार : बाल विवाह प्रतिबंधक अधिनियम 2006 अनुसार बाल विवाह में शामिल होने वाले सभी गुनाहगार की श्रेणी में आते हैं। विवाह विधि में भूमिका निभाने वाले आचार्य, पंडित, भड़जी, मौलवी से लेकर लड़का-लड़की के माता-पिता, मंगल कार्यालय, बैंड-बाजा, घोड़ीवाले तथा बारात में शामिल सभी के िखलाफ गुनाह दर्ज किया जा सकता है। -मुश्ताक पठान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी


Created On :   2 Jan 2026 1:45 PM IST

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