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Nagpur News: दीर्घकालिक सेवा मतलब स्थायी नौकरी नहीं : हाईकोर्ट

Nagpur News बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नागपुर महानगरपालिका में लंबे समय से काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को सिर्फ 240 दिनों की सेवा पूरी करने पर स्थायी नौकरी (नियमितीकरण) का हक नहीं मिलता। अगर पद स्वीकृत नहीं हैं, तो दीर्घकालिक सेवा के आधार पर नियमितीकरण नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति रोहित जोशी की पीठ ने औद्योगिक न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारियों को राहत दी गई थी।
नागपुर महानगर पालिका ने दी थी चुनौती :मामले की पृष्ठभूमि यह है कि कई सफाई कर्मचारियों ने, जो 1990 के दशक से लगातार काम कर रहे थे और हर साल 240 दिनों से ज्यादा सेवा दे रहे थे, इसलिए उन्होंने मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर्स (एमएसओ) के क्लॉज 4(सी) के तहत नियमितीकरण की मांग को लेकर औद्योगिक न्यायालय में शिकायतें दर्ज की थीं। औद्योगिक न्यायालय ने महानगरपालिका द्वारा अनुचित श्रमिक पद्धति अपनाने का निरीक्षण नोट करते हुए कर्मचारियों को स्थायी दर्जा देने का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजने के आदेश दिए थे। महानगरपालिका ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। नियमित भर्ती प्रक्रिया चलाए बिना संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी, ऐसा महानगरपालिका का तर्क था। इसलिए केवल 240 दिनों की सेवा पूरी करने मात्र से नियमितीकरण का अधिकार नहीं दिया जा सकता, ऐसा दावा महानगरपालिका ने किया।
बिना स्वीकृत पदों के रेगुलर नहीं किया जा सकता : हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संस्थाओं में भर्ती संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से होनी चाहिए। अगर पद स्वीकृत नहीं हैं, तो कोर्ट नियमितीकरण का आदेश नहीं दे सकता। पद सृजन प्रशासन का काम है, न कि कोर्ट का। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जहां कहा गया कि नियमितीकरण भर्ती का विकल्प नहीं है। कोर्ट ने माना कि कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन बिना स्वीकृत पदों के नियमित नहीं किए जा सकते। इसलिए औद्योगिक न्यायालय के सभी आदेश रद्द करते हुए, महानगरपालिका की याचिकाओं को स्वीकार किया गया।
Created On :   2 Jan 2026 11:57 AM IST















