विचरण: तेंदुओं का बढ़ा कुनबा : पेंच में 73, बोर में 39 और मेलघाट में 185 हुई संख्या

तेंदुओं का बढ़ा कुनबा : पेंच में 73, बोर में 39 और मेलघाट में 185 हुई संख्या
  • बाघ से चार गुना संख्या
  • वर्तमान में 2 हजार से ज्यादा की मौजूदगी
  • अक्सर लोगों को आ जाते हैं नजर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र में 5 साल में 300 से ज्यादा तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। वर्तमान स्थिति में वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के अनुसार 1985 तेंदुए मौजूद हैं, जबकि इनकी संख्या वर्ष 2028 में 1700 के करीब थी। ऐसे में 300 से ज्यादा तेंदुओं की संख्या बढ़ने का चित्र साफ है। बाघों की तुलना में यह संख्या चार गुना ज्यादा है। बाघों का कुनबा बढ़ने को लेकर वन विभाग की ओर से कई योजनाएं चलती रहती हैं, लेकिन तेंदुएं को लेकर ऐसी कोई उपाय योजना नहीं है। बावजूद इसके तेंदुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बाघों की तरह ही विदर्भ में इनकी संख्या ज्यादा है।

किस व्याघ्र प्रकल्प में कितने तेंदुओं की मौजूदगी : बोर व्याघ्र प्रकल्प में कुल 16 बाघ हैं, उनकी तुलना में तेंदुओं की संख्या 39 है, वहीं पेंच में बाघों की संख्या 43 है और तेंदुओं की संख्या 73 तक है। मेलघाट में तेंदुओं की संख्या 185 है, जो कि बाघों से दुगनी है। ताड़ोबा में भी 130 तेंदुएं मौजूद हैं। बाघों की तुलना में यह बहुत ज्यादा है। सह्याद्री में 89 तेंदुए मौजूद हैं। नवेगांव नागझिरा में 119 तेंदुए है।

अपना क्षेत्र छोड़ते रहते हैं : उक्त सभी क्षेत्र के वाइल्ड लाइफ एरिया में तेंदुओं की जो मौजूदगी है, उससे कहीं ज्यादा घूमते हैं। पेंच में 70 से 73 की मौजूदगी है, लेकिन बाहर से भी आने वाले तेंदुओं का कारण इनकी संख्या 175 से 184 तक हो जाती है। इसी प्रकार बोर में 37 से 39 तक मौजूदगी है, वही बाहर से आने वाले तेंदुओं के कारण संख्या 45 से 49 तक हो जाती है। यही हाल मेलघाट में 181 से 185 तक है, वही 233 से 243 घूमते हुए दिखाई पड़ते हैं। ताडोबा में 130 तेंदुए हैं, लेकिन बाहर के तेंदुए आने से 148 से 155 तक इस क्षेत्र में विचरण करते हैं।

Created On :   5 March 2024 11:04 AM GMT

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