सिख शौर्य का उत्सव: अरदास के साथ तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब में होला महल्ला पर्व का समापन

अरदास के साथ तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब में होला महल्ला पर्व का समापन
  • रहरास साहिब के पाठ और अरदास के साथ हुआ समापन
  • होला महल्ला का पावन उत्सव में लाखों की तादाद में जुटी संगत
  • दुनियाभर से आए सिखों ने किए शस्त्र दर्शन

Nanded News. सिखों के पांच तख्तों में एक तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब में होला महल्ला का पावन उत्सव सिख सिद्धांतों नाम जपो, किरत करो और वंड छको की भावना के साथ श्रद्धा और मर्यादा पूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर शौर्य (संत-सिपाही परंपरा) और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही गुरुद्वारा परिसर में गुरबाणी की मधुर ध्वनि गूंजती रही।

दोपहर 12:00 बजे गुरु साहिबान से संबंधित पवित्र शस्त्रों का सम्मानपूर्वक दर्शन एवं सत्कार किया गया। सिख परंपरा में शस्त्र केवल अस्त्र नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और आत्म-संरक्षण के प्रतीक माने जाते हैं।

सायं 4:00 बजे मुख्य कार्यक्रम का आरंभ हुआ। जत्थेदार सिंह साहिब संत बाबा कुलवंत सिंह के नेतृत्व में मर्यादा अनुसार निकाले गए नगर कीर्तन में निशान साहिब की अगुवाई, सुसज्जित घोड़े और नगाड़ों की स्वर-लहरियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहीं। गतका दल द्वारा प्रस्तुत युद्ध-कौशल के प्रदर्शन ने संत-सिपाही परंपरा की याद ताज़ा कर दी।


शोभायात्रा गुरुद्वारा गेट नंबर 1 से प्रारंभ होकर महावीर चौक (हल्ला बोल चौक) पहुंची, जहां परंपरा अनुसार “हल्ला बोल” का आयोजन किया गया। तत्पश्चात जुलूस बाउली साहिब मार्ग से होते हुए नगीनाघाट साहिब पहुँचा। पूरे मार्ग में संगत द्वारा “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

रात्रि में तख्त साहिब में संगत की उपस्थिति में रहरास साहिब के पाठ और सामूहिक अरदास के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ।

गुरुद्वारा बोर्ड द्वारा प्रशासक डॉ. विजय सतबीर सिंह के मार्गदर्शन में संगत के लिए लंगर सेवा, शुद्ध जल, चिकित्सा सहायता और ठहरने की उत्तम व्यवस्था की गई थी। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंची हजारों संगत ने इस पावन उत्सव में भाग लेकर गुरु घर की कृपा प्राप्त की।

Created On :   4 March 2026 9:43 PM IST

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