ऑर्गेनिक पैदावार: गोबर की खाद को उन्नत जैविक खाद में बदल रही खेती, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने का है दावा

गोबर की खाद को उन्नत जैविक खाद में बदल रही खेती, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने का है दावा
  • लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर
  • रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है
  • इससे पैदावार पूरी तरह से ऑर्गेनिक होता है

New Delhi News. खेती में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर सरकार का विशेष फोकस है। इसी क्रम में जायडेक्स ने जायटॉनिक टेक्नोलॉजी पर आधारित कृषि उत्पादों के जरिए गोबर और फसल अवशेषों को उन्नत जैविक खाद में बदलने की पहल की है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ किसानों की रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है। इससे पैदावार पूरी तरह से ऑर्गेनिक होता है।

क्या है जायटॉनिक तकनीक

जायटॉनिक तकनीक के तहत गोबर के साथ तकनीकी उत्पाद मिलाने से उसे पोषक तत्वों से भरपूर, गंधहीन और जैविक खाद में तेजी से परिवर्तित करने में मदद मिलती है। कंपनी के मुताबिक, इस खाद के इस्तेमाल से मिट्टी नरम, भुरभुरी और हवादार बनती है तथा मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ती है। इससे मिट्टी की जैविक गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उसकी जल धारण क्षमता में भी वृद्धि होती है।

कंपनी का कहना है कि मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ने से फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत पड़ सकती है और सिंचाई के बीच का अंतर बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, तकनीक पौधों के सफेद जड़ क्षेत्र के विकास में मदद करती है, जिससे जड़ों द्वारा पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण की संभावना बढ़ती है। इससे किसानों को यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है।

लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर

जायडेक्स के सीएमडी अजय रांका ने बताया कि कंपनी जायटॉनिक टेक्नोलॉजी के तहत कृषि क्षेत्र के लिए कई उत्पाद तैयार कर रही है। उनका कहना है कि तकनीक का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धति उपलब्ध कराना है, जिसमें मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखते हुए रासायनिक इनपुट पर होने वाले खर्च को कम किया जा सके। इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर खर्च में 50 फीसदी तक कमी आने और फसल उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुभव बताया है।

Created On :   31 Aug 2026 6:45 PM IST

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