गोपछड़े ने पूछा - पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही सरकार, आपराधिक मामलों में गिरफ्तार सांसद का नहीं होता है कोई विशेषाधिकार

गोपछड़े ने पूछा - पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही सरकार, आपराधिक मामलों में गिरफ्तार सांसद का नहीं होता है कोई विशेषाधिकार
  • नियम 229 के तहत लोस अध्यक्ष के कार्यालय को तुरंत देनी होती है सूचना
  • पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही सरकार

New Delhi News. बिहार के पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव तकरीबन तीन दशक से ज्यादा पुराने एक मामले में गिरफ्तार हुए हैं। उनकी गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई है, जब संसद का बजट सत्र चल रहा है। ऐसे में सांसदों को मिलने वाले विशेषाधिकार के बारे में चर्चा आम है। हालांकि, लोकसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी की स्थिति में सांसद का कोई विशेषाधिकार नहीं होता है। गिरफ्तार सांसद एक आम नागरिक की तरह ही होता है। सांसदों के विशेषाधिकार से जुड़े नियमों के बारे में पूछे जाने पर लोकसभा सचिवालय के एक पूर्व अधिकारी ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि संसद सत्र के दौरान भी आपराधिक मामलों में शामिल किसी सांसद को गिरफ्तार किया जा सकता है। लोकसभा की रूल बुक के नियम 229 में स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी होती है कि सांसद को गिरफ्तार करने के बाद वह अविलंब लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को इसकी सूचना दे। इसके साथ ही जब सांसद को रिहा किया जाता है, उस वक्त भी रिहाई की सूचना तत्काल लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को देनी होती है। यह रिहा करने वाली अथॉरिटी की जिम्मेदारी होती है। इसका नियम 230 में स्पष्ट उल्लेख है। पूर्व अधिकारी ने बताया कि अगर गिरफ्तारी या रिहा करने की सूचना अपूर्ण या विलंब से दी जाती है, तो इसे लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की अवमानना मानी जाती है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पृष्ठभूमि तैयार हो जाती है। पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संसद सत्र के दौरान गिरफ्तार सांसद को वेतन तो मिलता रहता है, लेकिन दैनिक भत्ता नहीं मिलता है,क्योंकि वह इस अवधि में सत्र से अनुपस्थित रहता है।

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही सरकार? : गोपछड़े

उधर भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ अजीत गोपछड़े ने सोमवार को सरकार से पूछा कि क्या आम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए कौन-कौन से ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जा रहे हैं? डॉ गोपछड़े ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा स्थापित रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार आज देश की आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ कीमतों की स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो सराहनीय है। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से जानना चाहा कि क्या भविष्य में सरकार ने कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार की तरह, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के लिए भी रणनीतिक या बफर भंडारण व्यवस्था विकसित करने का कोई निर्णय लिया है या ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है? भाजपा सांसद ने यह भी सवाल किया कि क्या रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने के लिए किया जा रहा है?

Created On :   9 Feb 2026 7:49 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story