नीट-यूजी पेपर लीक: नीट पर संसदीय समिति की बैठक पर आमंत्रित डॉक्टरों का कुछ सांसदों ने किया विरोध, न्यायिक हिरासत में मामले के तीन आरोपी

नीट पर संसदीय समिति की बैठक पर आमंत्रित डॉक्टरों का कुछ सांसदों ने किया विरोध, न्यायिक हिरासत में मामले के तीन आरोपी
  • आमंत्रित डॉक्टरों का कुछ सांसदों ने किया विरोध
  • नीट पर संसदीय समिति की बैठक पर आमंत्रित डॉक्टरों का विरोध

New Delhi News. शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सोमवार संसद भवन परिसर में बैठक हुई। इस बैठक में नीट संबंध विषयों पर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ़्रंट (यूडीएफ) के प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन एजेंडा में उनका उल्लेख होने के बावजूद बैठक में प्रवेश पर अचानक रोक लगा दी गयी। संसद पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि वे समिति की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। बैठक में शामिल कुछ सांसदों ने डॉक्टरों के शामिल होने का विरोध किया। इस दौरान संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बैठक से बाहर निकलकर समिति के कुछ सांसदों के विरोध के कारण मेडिकल स्टूडेंट्स की भागीदारी कराने में असमर्थता जताई। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए यूडीएफ प्रतिनिधियों के सुझाव पत्र पर चर्चा की और उसे रिकॉर्ड में लेने का आश्वासन दिया। यूडीएफ के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवा डॉक्टरों को औपचारिक निमंत्रण के बाद भी समिति के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला, हम संसदीय प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन भारत की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं से जुड़े मामलों में हितधारकों को सुना जाना चाहिए। यूडीएफ़ ने एनटीए को भंग करके संसद के अधिनियम के जरिए एक नई एजेंसी बनाने की मांग की है। साथ ही नीट-यूजी- 2026 और नीट-यूजी 2024 से जुड़े अनसुलझे मुद्दों की व्यापक जांच की मांग की गई है। इसमें पेपर लीक के आरोप, सेंटर आवंटन पैटर्न, ग्रेस मार्क्स विवाद, एजेंसियों-वेंडरों की भूमिका और परीक्षा सुरक्षा शामिल हैं।

तीन आरोपियों को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा

नीट-यूजी पेपर लीक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को तीन मुख्य आरोपियों डॉ मनोज शिरूरे, तेजस हर्षद कुमार शाह और मनीषा हवलदार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष सीबीआई जज अजय गुप्ता की अदालत ने यह आदेश सीबीआई द्वारा पूछताछ के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने पर दिया। सीबीआई ने अदालत से तीनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की थी। जांच एजेंसी की ओर से दलील दी गई कि मामले में बड़े स्तर पर साजिश की जांच के लिए आरोपियों से और पूछताछ जरूरी है। सीबीआई के अनुसार, डॉ मनोज ने शिवराज मोटेगांवकर से पांच लाख रूपये लिए थे, जो राशि उनकी बहन के घर से बरामद की गई है। उधर शिरूर के वकील ने हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने 19 मई को लातूर में जांच में शामिल होकर पूरा सहयोग किया था और उनसे कई बार पूछताछ भी की जा चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एजेंसी के पास केवल एक बयान और बरामदगी के अलावा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि शिरूरे परीक्षा लीक की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल था और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। कई अन्य आरोपियों की पहचान और विभिन्न स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई जारी है, जिसके लिए हिरासत जरूरी है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि तेजस शाह ने कथित तौर पर परीक्षा का प्रश्नपत्र मनीषा हवलदार को उपलब्ध कराया।

Created On :   1 Jun 2026 9:59 PM IST

Tags

Next Story