comScore

हादसा: भीमा नदी पुल पर ट्रक से भिड़ी टू व्हीलर, 2 लोगों की मौत 1 घायल

हादसा: भीमा नदी पुल पर ट्रक से भिड़ी टू व्हीलर, 2 लोगों की मौत 1 घायल

डिजिटल डेस्क, पुणे। पुणे के राजगुरूनगर स्थित भीमा नदी के पुल पर शनिवार सुबह करीब सवा 11 बजे एक दुपहिया वाहन के ट्रक से टकराने पर दो लोगों की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक दुपहिया में पिता और बेटी सवार थे, जो निरगुडसर गांव में थापलिंग यात्रा में शामिल होने जा रहे थे। बहरहाल पुलिस ने ज्ञानेश्वर सखाराम गोटेकर नाम के ट्रक चालक को हिरासत में लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह सतीश बालकृष्ण वलसे-पाटील, अपनी पत्नी जयश्री और बेटी के आरोही साथ दुपहिया से आंबेगांव तहसील स्थित निरगुडसर गांव थापलिंग यात्रा के लिए निकले हुए थे। सुबह करीब सवा ग्यारह बजे राजगुरूनगर स्थित भीमा नदी के पुल से जाते समय दुपहिया ट्रक से जा टकराई। इसमें सतीश और उनके बेटी की ट्रक के पहिये के नीचे आने से मौत हो गई वहीं सतीश की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम घटनास्थल पहुंच गई। पुलिस ने सतीश की पत्नी जयश्री को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही सतीश और आरोही का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।  सतीश पुणे में काम करते थे। पत्नी और बेटी के साथ वे पुणे में ही रहते थे। शनिवार को यात्रा होने के कारण वे अपने मूल गांव निरगुडसर निकले हुए थे। घटना से गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

नाबालिग के यौन शोषण मामले में पांच साल की सजा
मुंबई की विशेष पाक्सो अदालत ने दो नाबालिग बच्चियों का यौन उत्पीड़न करनेवाले आटोरिक्शा ड्राइवर को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोनों नाबालिग बच्चियां मामले में दोषी पाए गए आटोरिक्शा ड्राइवर रिजवान शेख के बेटी की दोस्त थी। दोनों शेख की बेटी के साथ ट्यूशन पढ़ती थी।

एक दिन आरोपी ने दोनों नाबालिग बच्चियों को अपने घर पर बुलाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। नाबालिग बच्चियों ने ट्यूशन टीचर को इस मामले की जानकारी दी। इसके बाद मामले को लेकर पुलिस में शिकायत की गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दायर किया। न्यायाधीश संझश्री घरत ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद कहा कि इस मामले के आरोपी के प्रति बिल्कुल भी नरमी नहीं दिखा सकते। ऐसे आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए और लोगों में अपराध को लेकर खौफ पैदा हो।  यदि हम आरोपी के प्रति नरमी दिखाएगे तो समाज में नाबालिग के खिलाफ दिन प्रति दिन अपराध बढेंगे बल्कि समाज में गलत संदेश जाएगा। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने आरोपी पर लगे आरोपों को पूरी तरह से साबित किया है। इसलिए आरोपी के इस मामले में दोषी ठहराया जाता है और उसे पाक्सो कानून के तहत पांच साल के कारावास की सजा सुनाई जाती है।
 

कमेंट करें
MSnja