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तिलवाराघाट के पास नर्मदा नदी के 300 मीटर के विवादित क्षेत्र में निर्माण पर रोक 

तिलवाराघाट के पास नर्मदा नदी के 300 मीटर के विवादित क्षेत्र में निर्माण पर रोक 

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने तिलवाराघाट के पास नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में स्थित उस विवादित क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा दी है, जनहित याचिका में जिस क्षेत्र में अवैध खुदाई और निर्माण का आरोप लगाया गया था। जस्टिस अंजुली पालो और जस्टिस विजय शुक्ला की युगल पीठ ने दयोदय पशु संवद्धन केन्द्र और गौशाला संचालक को निर्देशित किया है कि 300 मीटर के दायरे में स्थित विवादित क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं करें। युगल पीठ ने राज्य सरकार, संभागायुक्त, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जून को निर्धारित की गई है।

गौशाला के संचालक कर रहे निर्माण
नर्मदा मिशन के नीलेश रावल की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण और खनन प्रतिबंधित है। नदी के 300 मीटर के दायरे में राइटेरियन जोन और हाई फ्फ्लड लेबल जोन भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भी नदी के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी दयोदय पशु संवद्द्र्धन केन्द्र व गौशाला के संचालक तिलवाराघाट के पास नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में खुदाई और निर्माण कर रहे है। वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी और सौरभ  तिवारी ने तर्क दिया कि अनावेदक नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में खुदाई और निर्माण कर रहे है। यदि अनावेदक को खुदाई और निर्माण से नहीं रोका गया तो नर्मदा नदी का मूल स्वरूप परिवर्तित होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा दबाव के कारण इस कृत्य की अनदेखी कर रहा है। दयोदय पशु संवद्द्र्धन केनद्र और गौशाला की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर और दयाराम विश्वकर्मा ने तर्क दिया कि निर्माण कार्य 300 मीटर के दायरे के बाहर किया जा रहा है। अनावेदक की ओर से इस आशय का शपथ पत्र भी पेश किया गया। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने तिलवाराघाट के पास नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में स्स्थित उस विवादित क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा दी है। 

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