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ग्वालियर : पुलिस अफसर का नारा, स्वच्छता के लिए श्रमदान को बनाएं सहारा

November 30th, 2019 10:47 IST
ग्वालियर : पुलिस अफसर का नारा, स्वच्छता के लिए श्रमदान को बनाएं सहारा

हाईलाइट

  • ग्वालियर : पुलिस अफसर का नारा, स्वच्छता के लिए श्रमदान को बनाएं सहारा

डिजिटल डेस्क,ग्वालियर। खाकी वर्दी की छवि जब अच्छी नहीं हो, तब यह कल्पना आसानी से नहीं की जा सकती कि कोई खाकीवर्दी वाला समाज में बदलाव की मुहिम छेड़ सकता है। मगर मध्य प्रदेश में एक पुलिस अधिकारी ने इस धारणा को मिटाने की मुहिम छेड़ दी है।

पुलिस अधिकारी ने अभियान में सभी लोगों से माह के पहले रविवार को श्रमदान कर स्वच्छता में सहभागी बनने की अपील कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन से विभिन्न वर्ग अपने-अपने तरह से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि यह मिशन जन-जन का अभियान बन गया है। ग्वालियर परिक्षेत्रके अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह भी ग्वालियर में अपने तरह का स्वच्छता अभियान शुरू करने जा रहे है। उन्होंने लोगों से माह के पहले रविवार को एक घंटे स्वच्छता के लिए श्रमदान करने का आह्वान किया है। इसकी शुरुआत एक दिसंबर से होने जा रही है, क्योंकि इस दिन माह का पहला रविवार है।

जीवाजी विश्वविद्यालय का क्षेत्र हरियाली के कारण सभी के आकर्षक का केंद्र होता है और यहां सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग घूमने आते हैं। एडीजी राजा बाबू सिंह ने आईएएनएस से चर्चा के दौरान बताया कि वे भी सुबह के समय इस क्षेत्र में घूमने जाते हैं, मगर यहां नजर आने वाली पॉलीथिन सुबह के स्वच्छ वातावरण में चुभन पैदा करने वाली होती है। लिहाजा, उन्होंने इस क्षेत्र को पॉलीथिन मुक्त बनाने का संकल्प लिया और लोगों से सहयोग मांगा है।

एडीजी ने समाज के विभिन्न वर्गो से अपील की है कि माह के पहले रविवार को एक घंटा श्रमदान कर क्षेत्र को पॉलीथिन मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए आगे आएं।

राजा बाबू सिंह लोगों में जागृति लाने और अपने अभियान में सहयोग लाने के लिए कपड़े के बैनर लगाए हैं, जिसमें लोगों से स्वच्छता के लिए श्रमदान करने की अपील की गई है। इस अभियान के जरिए जीवाजी विश्वविद्यालय के क्षेत्र को साफ-सुथरा और हरियाली वाला बनाएं। स्वच्छता के लिए श्रमदान करें और पौधे भी रोपें। इस अभियान में सुबह घूमने वालों के साथ छात्र-छात्राएं भी जुड़ रहे हैं।

ग्वालियर में पदस्थ एडीजी राजा बाबू सिंह ने गांधी और गीता पर खुद को केंद्रित करके लोगों में बदलाव लाने का अभियान चलाया है। वे विभिन्न वर्गो से जुड़े लोगों के बीच जाकर गांधी के सत्य-अहिंसा के संदेश पहुंचा रहे हैं तो श्रीमद् भागवत गीता का वितरण कर गीता को आत्मसात करने पर भी जोर दे रहे हैं।

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