दैनिक भास्कर हिंदी: मराठा आरक्षण : 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर किया झनका भाकर का भोजन 

August 6th, 2018

डिजिटल डेस्क, अकोला। मराठा समाज की विभिन्न मांगों को लेकर मराठा क्रांति मोर्चा व सकल मराठा समाज की ओर से प्रदेश के गृह राज्यमंत्री तथा अकोला के पालकमंत्री डॉ. रणजीत पाटील के जठारपेठ परिसर के निवास के सामने ठिया आंदोलन किया गया। सुबह किए गए इस आंदोलन में आंदोलनकर्ताओं ने एक मराठा , लाख मराठा की नारेबाजी की।

आवास पर उपस्थित डॉ. पाटील ने आंदोलनकारियों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनी तथा आंदोलनकर्ताओं द्वारा साथ लाई झुनका भाकर उनके साथ बैठकर खाई। आरक्षण की मांग करते हुए मराठा क्रांति मोर्चा ने समूचे महाराष्ट्र में आंदोलन शुरू किया है। कई स्थानों पर युवाओं तथा बुजुर्गों द्वारा आत्महत्याएं किए जाने तथा काकासाहब शिंदे द्वारा जलसमाधि लिए जाने के बाद उग्र हो चुके आंदोलन के दूसरे चरण में 1 अगस्त को जनप्रतिनिधियों के घरों के सामने गोंधल आंदोलन किया था। 

पालकमंत्री डॉ. रणजीत पाटील के घर के सामने ठिया आंदोलन किया गया। जिसमें शामिल आंदोलनकर्ताओं ने 'असा कसा देत नहीं घेतल्या शिवाय राहत नाहीं, 'तुमचे आमचे नाते काय-जय जिजाऊ, जय शिवराय की नारेबाजी करते हुए आरक्षण देने की मांग की। इस दौरान आवास पर उपस्थित गृहराज्यमंत्री डॉृ. पाटिल ने आंदोलनकारियों के बीच आकर उनकी मांगें तथा समस्याएं सुनी तथा मुख्यमंत्री समेत शासन की ओर से मराठा आरक्षण पर सकारात्मक रूख की जानकारी देते हुए मराठा आरक्षण के प्रति सरकार की वचनबध्दता दोहराई।

दोपहर को आंदोलनकर्ताओं ने पालकमंत्री के आवास के सामने झुनका-भाकर का भोजन किया।  भोज में पालकमंत्री स्वयं भी शामिल हुए। आंदोलन के दौरान पालकमंत्री आवास परिसर में पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त तैनात किया गया था। 

प्लास्टिक पाबंदी की धज्जियां
अकोला जिले समेत राज्य में सरकार ने प्लास्टिक, थर्मोकोल सामग्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई है, लेकिन आज भी यह सामग्री दुकानों में मिल रही है। इसका उदाहरण आज गृह राज्यमंत्री व पालकमंत्री रणजीत पाटील के घर के सामने किए गए झुनका-भाकर आंदोलन में सामने आया। थर्मोकाल की थाली, केले के आकार की प्लास्टिक कोटिंगवाली पत्तलें, प्लास्टिक ग्लास का इस्तेमाल भोजन के समय किया गया। उल्लेखनीय है कि गृह राज्यमंत्री रणजीत पाटील ने भी उसी थाली में भोजन किया, जिस पर उनकी ही सरकार ने पाबंदी लगाई हुई है। अब सवाल यह उठता है कि पाबंदी के दौर में यह सामग्री किस दुकान से खरीदकर लाई गई?