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रायपुर : ​​​​​​​धान की कस्टम मिलिंग के लिए शासन ने जारी की नीति

December 01st, 2020 17:25 IST
रायपुर : ​​​​​​​धान की कस्टम मिलिंग के लिए शासन ने जारी की नीति

डिजिटल डेस्क, कांकेर। सहित रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के जिलों में 31 मई तक मिलर्स करेंगे धान का उठाव कोरबा सहित बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों में धान उठाव 31 मार्च तक मिलर्स को 30 जून तक चावल जमा करना अनिवार्य राज्य शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान की कस्टम मिलिंग के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया गया है। खरीफ वर्ष 2020-21 में उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के उपरांत मिलर्स को 30 जून तक उपार्जन एजेन्सियों को चावल जमा कराना होगा। जारी आदेश के अनुसार बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों (कांकेर जिले को छोड़कर) एवं कोरबा जिले में उपार्जित होने वाले समस्त धान की कस्टम मिलिंग के लिए 31 मार्च तक उठाव करना जरूरी होगा। इसी तरह रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर संभाग के जिलों (कोरबा को छोड़कर) तथा कांकेर जिले में उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिए 31 मई तक मिलर्स को उठाव करना होगा। खरीदी केन्द्रों से समस्त धान का उठाव 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में उपार्जित धान की त्वरित मिलिंग उपरांत चावल का अंतरण उपार्जन एजेन्सी छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कॉपोरेशन एवं भारतीय खाद्य निगम को किया जाएगा। कस्टम मिलिंग के लिए मार्कफेड द्वारा संचालित किसान राईस मिलों को धान प्रदाय किया जा सकेगा। इसके लिए किसान राईस मिल का पंजीयन कराना अनिवार्य है। पंजीकृत मिल द्वारा आवेदन देने पर कस्टम मिलिंग की अनुमति कलेक्टर द्वारा दी जाएगी। मिल को एक बार में अधिकतम 4 माह की मिलिंग क्षमता की अनुमति दी जा सकती है। अरवा मिल को सिर्फ अरवा चावल की मिलिंग हेतु अनुमति दी जाएगी। बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों में पीडीएस में अरवा चावल की जरूरतों की पूर्ति के लिए उसना मिल को भी अरवा मिलिंग की अनुमति दिए जाने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के अन्य जिलों में विशेष परिस्थिति में ही प्रबंध संचालक मार्कफेड द्वारा कलेक्टर से प्रस्ताव प्राप्त होने पर परीक्षण कर उसना मिल को अरवा मिलिंग की अनुमति प्रदान की सहमति दी जा सकेगी। अंतर जिला मिलिंग की स्थिति में मूल जिले का जिला विपणन अधिकारी अन्य जिले के लिए डिलीवरी आर्डर जारी कर सकेगा। जिला विपणन अधिकारी द्वारा अंतर जिला मिलिंग के लिए निकटस्थ उपार्जन केन्द्र, संग्रहण केन्द्र से धान प्रदाय करेगा। जिला विपणन अधिकारी द्वारा डिलीवरी आर्डर करने के पश्चात 10 दिवस के भीतर धान का उठाव करेंगे। सरना धान यथासंभव अरवा मिलिंग के लिए ही दिया जाए। गौरतलब है कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में प्रदेश के किसानों से 1 दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हो रही है। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 21 लाख 29 हजार 764 किसानों ने पंजीयन कराया है। जिनके द्वारा बोये गए धान का रकबा 27 लाख 59 हजार 385 हेक्टेयर है। विपणन वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 19 लाख 55 हजार 541 किसानों ने पंजीयन कराया था। चालू विपणन वर्ष में किसानों की संख्या और धान के रकबे में बढ़ोत्तरी को देखते हुए इस साल समर्थन मूल्य पर बीते वर्ष की तुलना में अधिक खरीदी का अनुमान है। इस संबंध में 29 नवम्बर को मंत्रालय महानदी भवन से खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश, राज्य के सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को भेजा गया है। आदेश में कस्टम मिलिंग से संबंधित निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ ही इन निर्देशों से संबंधित जिलों के राईस मिलर एसोशिएशन के पदाधिकारियों को अवगत कराने को कहा गया है। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।