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बंद खदान से निकल रहा धुआं, क्षेत्र में फैली दहशत

बंद खदान से निकल रहा धुआं, क्षेत्र में फैली दहशत


डिजिटल डेस्क छिन्दवाड़ा/परासिया। पेंचक्षेत्र के रावनवाड़ा खास स्थित बंद भूमिगत कोयला खदान पिट से कई जगहों पर प्री-मानसून होने पर तेज धुआं निकलकर आसपास के क्षेत्र में फैल रहा है। स्वत: तपन प्रक्रिया के चलते खुले में पड़े कोयला के छोटे-छोटे टुकड़े ओर कोयला चूर की वजह से ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। वहीं प्रबंधन ने अब तक इस समस्या से निपटने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।
एक पखवाड़ा में दूसरी बार निकल रहा जमीन से धुआं-
रावनवाड़ा खास के बंद खदान पिट से एक पखवाड़ा में दूसरी बार जमीन से धुआं निकलने की घटना सामने आई है। लगभग 13 साल पहले रावनवाड़ा खदान को जहरीली गैस रिसाव होने के चलते ही बंद किया गया था। खदान पिट पर पहली बार निकले सफेद धुआं को देखकर स्थानीय लोग जहरीली गैस रिसाव की आशंका जताते हुए भयभीत हो रहे थे। हालाकि खदान प्रबंधन ने इसे स्वत: तपन प्रक्रिया में कोयला में लगी आग बताकर उसे जल्द बुझाने का आश्वासन दिया था। किन्तु अब तक यहां कोई कार्य नहीं किए गए।
आंखों में जलन और आंसू निकलने की हो रही शिकायतें-
ग्रामीणों के अनुसार खदान पिट से निकल रहे धुआं या गैस से स्थानीय लोगों को आंखों में जलन और आंसू निकलने की तकलीफें हो रही हैं। स्थानीय निवासी राकेश पाल, ग्वाल तिवारी, धनलाल नागवंशी कहते हैं कि पहले कोयला का उपयोग स्थानीय लोगों द्वारा रसोई ईंधन के रूप में होता था, किन्तु तीन दशक से कोयला के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिससे खदान पिट से कोयला जलने का धुआं निकल रहा है अथवा कोई गैस का रिसाव हो रहा, ऐसी स्थिति में लोगों को आंखों में जलन और आंसू निकलने की तकलीफें हो रही है।
गड्ढा खोदकर मिट्टी पुराव का बना रहे थे प्रपोजल-
जमीन से धुआं निकलने की समस्या से बचाने पंचायत और वेकोलि द्वारा पानी डाला गया। वहीं वेकोलि प्रबंधन ने यहां खुदाई कर मिट्टी पुराव करवाने का प्रपोजल तैयार कर मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया, किन्तु अब तक उक्त प्रपोजल पर कोई काम नहीं हुआ है। जिससे लोगों का कहना है कि वेकोलि प्रबंधन सिर्फ आश्वासन देता है, किन्तु जनहित में कोई विशेष कार्य नहीं करता है।
इनका कहना है-
बंद खदान पिट पर स्वत: तपन प्रक्रिया से कोयला में आग लगी, जो बरसाती पानी के संपर्क में आने पर धुआं मिक्स भाप बनकर बाहर निकलती दिख रही है। जिसको बुझाने पानी डाल रहे हैं। उस पर मिट्टी का पुराव कर हवा का सम्पर्क रोककर उसे बाहर निकलने से रोकने प्रपोजल मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
  विजय पासकल, प्रबंधक, रावनवाड़ा क्षेत्र

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।