दैनिक भास्कर हिंदी:  एम्स भोपाल के तीन आयुष चिकित्सकों की सेवा समाप्ति पर रोक , हड़ताल में हिस्सा लेने का आरोप

June 1st, 2019

डिजिटल डेस्क, भोपाल। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने एम्स भोपाल के तीन आयुष चिकित्सकों की सेवा समाप्ति पर रोक लगा दी है। कैट के न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर ने एम्स भोपाल को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अगले आदेश तक कार्य करने दिया जाए। 

एम्स भोपाल में हुई हड़ताल में हिस्सा लेने का आरोप

भोपाल निवासी डॉ. अमित कुमार वर्मा, डॉ. अजय सिंह बघेल और डॉ. शक्ति सिंह परिहार की ओर से दायर याचिका में कहा कि वे वर्ष 2012-13 से एम्स भोपाल में आयुष चिकित्सक के पद पर कार्यरत है। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने 8 अक्टूबर 2018 को एम्स भोपाल में हुई हड़ताल में हिस्सा लिया। इसके आधार पर 27 मई 2019 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। अधिवक्ता नरिन्दर पाल सिंह रूपराह ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का सेवा समाप्ति का आदेश दोषपूर्ण तरीके से निकाला गया है। सेवा समाप्ति के लिए केवल कारण बताओ नोटिस दिया गया है, आरोपों की विभागीय जांच नहीं की गई। कारण बताओ नोटिस में जो आरोप लगाए है, उनसे भिन्न कारणों के आधार पर उनकी सेवा समाप्त की गई। यह प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं के पक्ष में पहले से स्स्थगन आदेश था। इसके बाद भी उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। सुनवाई के बाद कैट ने आयुष चिकित्सको की सेवा समाप्ति पर रोक लगाते हुए उन्हें अगले आदेश तक कार्य करने का आदेश दिया है।

एसपी के माध्यम से गिरफ्तारी वारंट तामील कराने का आदेश
प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी हरीश वानवंशी ने चेक बाउंस मामले में गौतम नगर महाराजपुर निवासी नरेश तिवारी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पुलिस अधीक्षक के माध्यम से तामील कराने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश वारंट तामीली में अधारताल थाना पुलिस द्वारा की जा रही हीलाहवाली को देखते हुए दिया है। 
प्रकरण के अनुसार न्यू रामनगर निवासी अजय पांडे ने वर्ष 2013 में गौतम नगर महाराजपुर निवासी नरेश तिवारी से प्लाट खरीदने का सौदा किया था। प्लाट खरीदने के लिए डेढ़ लाख रुपए की राशि दी गई थी। जब प्लाट नहीं दिया गया तो रकम वापस मांगी गई। काफी प्रयासों के बाद नरेश तिवारी ने 30 जनवरी 2018 को डेढ़ लाख रुपए का चेक दिया, लेकिन बैंक में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। न्यायालय ने तीन बार नरेश तिवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, लेकिन अधारताल पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट तामील नहीं किया। अधिवक्ता प्रमोद तिवारी और विजय यादव ने तर्क दिया कि अधारताल पुलिस जानबूझकर गिरफ्तारी वारंट तामील नहीं कर रही है। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक के माध्यम से गिरफ्तारी वारंट तामील कराने का आदेश दिया है।
 

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