शोध पत्र प्रकाशित: सौरभ जाधव को मरणोपरांत अंतरराष्ट्रीय सम्मान, जिस कैंसर पर शोध कर रहे थे, उसी से जूझते हुए हुआ था निधन कैंसर पर शोध पत्र प्रकाशित

सौरभ जाधव को मरणोपरांत अंतरराष्ट्रीय सम्मान, जिस कैंसर पर शोध कर रहे थे, उसी से जूझते हुए हुआ था निधन       कैंसर पर शोध पत्र प्रकाशित
  • जिस कैंसर पर वे शोध कर रहे थे, उसी बीमारी से जूझते हुए करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उनका निधन
  • परिजनों के लिए क्षण गर्व के साथ-साथ गहरी पीड़ा का भी है

Parbhani News. परभणी के युवा शोधकर्ता सौरभ जाधव द्वारा ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के उपचार पर लिखा गया शोध पत्र वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘बायो-नैनो-साइंस’ में प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि उन्हें मरणोपरांत मिली है, जिससे उनके परिवार और क्षेत्र में गर्व के साथ-साथ भावुकता का माहौल है।

संघर्षपूर्ण यात्रा

सौरभ जाधव ने यह शोध कार्य वर्ष 2021-2022 के दौरान नीपर (NIPER), गुवाहाटी में एम.एस. की पढ़ाई करते समय किया था। विडंबना यह रही कि जिस कैंसर पर वे शोध कर रहे थे, उसी बीमारी से जूझते हुए करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया।

वैज्ञानिक योगदान

अपने शोध में उन्होंने ‘डासाटिनिब’ दवा की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए एक उन्नत ड्रग डिलीवरी सिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह तकनीक कैंसर कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सहायक साबित हो सकती है।

साहित्यिक विरासत

सौरभ के संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन अनुभवों को ‘मृत्यु जगलेला माणूस’, ‘अमरत्वाच्या नोंदी’ जैसे ग्रंथों तथा ‘मौनांतर’ नामक नाटक के माध्यम से संकलित और प्रस्तुत किया गया है।

सौरभ के पिता सुनील जाधव और माता साधना जाधव के लिए यह क्षण गर्व के साथ-साथ गहरी पीड़ा का भी है, क्योंकि उनका बेटा अपनी इस वैश्विक उपलब्धि को देखने के लिए आज उनके बीच नहीं है।

Created On :   10 March 2026 5:56 PM IST

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