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Selu News: पारंपरिक मृदा स्नान के साथ हर्षोल्लास से मनाई गई धूलिवंदन, उत्साहपूर्ण रहा गीत-संगीत का कार्यक्रम

Selu News. परभणी जिले के सेलू में ‘गांधी प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग मंडल’ तथा ‘श्रीरामजी भांगडिया रुग्णसेवा मंडल’ के तत्वावधान में होली के उपलक्ष्य में मंगलवार, 3 मार्च को पारंपरिक मृदा स्नान के साथ धूलिवंदन का पर्व अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाया गया।
इस अनूठे उपक्रम का यह 20वां वर्ष था। सेलू के चंद्रप्रकाश सांगतानी एवं गंगाधर शेरे पाटिल के खेतों से प्रारंभ हुई मृदा स्नान की यह परंपरा विगत तीन वर्षों से मंठा रोड स्थित मालाणी के ‘होटल परिवार फार्म एवं एग्रो टूरिज्म’ परिसर में संयोजक शिवनारायण मालाणी के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। इस वर्ष भी मृदा स्नान के पश्चात अंकुरित धान्य एवं आयुर्वेदिक काढ़े के सेवन की परंपरा का विधिवत निर्वाह किया गया।
इस अवसर पर शिवनारायण मालाणी, हितेश शाह, रेवा कुंदनानी, प्रवीण मानकेश्वर, आनंद बाहेती, वल्लभ राठी, सतीश जाधव, रोहित काला, भास्करराव घोड़के, कैलासराव काले, श्रीपाद रोडगे, डॉ. विलास मोरे, गंगाधर कान्हेकर, सुनील गायकवाड, बाबासाहेब हेलसकर, कृष्णा काटे, वाल्मीकि घाडगे (परतूर), दिगंबर डोंबे, राम सुरवसे, रामकिशन कटारे, सुभाष मोहकरे, प्रेमगोपाल कासट (मंठा) सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।
साथ ही आरोही ढवले, स्वराज जाधव, राघव एवं श्लोक काटे जैसे नन्हें बालकों ने भी बड़े उत्साह के साथ मिट्टी स्नान का आनंद लिया।
इस उपलक्ष्य में आयोजित गीत-संगीत कार्यक्रम को भी श्रोताओं का भरपूर प्रतिसाद मिला। कृष्णा काटे, डॉ. विलास मोरे, गंगाधर कान्हेकर एवं वाल्मीकि घाडगे ने अपने सुरीले गीतों की प्रस्तुति से उपस्थित जनों का मन मोह लिया। इस अवसर पर गणेश सिंह, विष्णु, करण सिंह, यश आचलिया आदि भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संयोजक शिवनारायण मालाणी ने बताया, “आयुर्वेद में मृदा स्नान (मिट्टी के स्नान) का विशेष महत्व है। तिल के तेल से शरीर की मालिश करने के पश्चात मिट्टी का लेप लगाया जाता है और लगभग एक घंटे तक धूप में बैठकर उसे सुखाया जाता है। इसके बाद स्नान किया जाता है। ऋतुचक्र के अनुसार यह प्रक्रिया शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।”
Created On :   4 March 2026 6:47 PM IST













