Shahdol news: गोंड़ी पेंटिंग, काष्ठ शिल्प, रॉट आयरन और कालीन-दरी से आत्मनिर्भर हो रही महिलाएं

गोंड़ी पेंटिंग, काष्ठ शिल्प, रॉट आयरन और कालीन-दरी से आत्मनिर्भर हो रही महिलाएं
आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद रख रहीं छतवई ग्राम में महिलाएं

डिजिटल न्यूज़ शहडोल

शहडोल से करीब 6 किलोमीटर दूर छतवई ग्राम के संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम में बदलते भारत की उम्मीद के साथ बैगा आदिवासी युवा और महिलाएं हस्तकला एवं हस्तशिल्प के हुनर से देश के विकास की इबारत गढ़ रहे हैं। यह केन्द्र वर्ष 2012 में वित्तीय संकट के चलते बंद हो गया था जो 14 वर्ष बाद मार्च 2026 में पुनः शुरू हुआ। इस समय यहां लगभग 15 महिलाएं और 15 बैगा युवा हस्तकला का हुनर सीखकर आकर्षक काष्ठ मूर्तियां,कालीन,दरी,और गोंडी पेंटिंग बना रहे हैं।बस्तर से आए प्रशिक्षकों यश कुमार मंडावी व रामप्रसाद बघेल के मार्गदर्शन में बैगा आदिवासी समुदाय के युवा और महिलाएं अपनी पारंपरिक कला को निखार रहे बल्कि बदलते बाज़ार की जरूरतों को भी समझ रहे हैं। महिलाएं अपनी हस्तकला से जहां आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद रख रहीं वहीं महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दे रही हैं।

Created On :   8 Aug 2026 4:13 PM IST

Tags

Next Story