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सीधी न्यूज: नियमित प्राचार्यों का संकट गहराया, बैसाखी के भरोसे चल रही स्कूली शिक्षा

डिजिटल डेस्क सीधी।गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का दावा करने वाली सरकार जिले के एक सैकड़ा से अधिक शासकीय स्कूलों को नियमित प्राचार्य नहीं दे पाई है, जिसके चलते प्रभार की बैसाखी से काम चलाया जा रहा है। लंबे समय से प्राचार्यों के पद रिक्त होने के कारण विभाग द्वारा कई स्कूलों में वरिष्ठ शिक्षकों को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कामचलाऊ व्यवस्था से स्कूलों का संचालन तो किसी तरह जारी है, लेकिन प्रभारी प्राचार्यों पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों
का बोझ बढ़ गया है। प्रभारी प्राचार्यों को स्कूल में शिक्षण कार्य के साथ-साथ कार्यालयीन कामकाज, विभागीय पत्राचार, विद्यार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड, परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं, शिक्षकों की निगरानी, बैठकों और विभिन्न विभागीय निर्देशों का पालन करने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। ऐसे में उन्हें अपने मूल शिक्षण कार्य के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। प्रभारी प्राचार्यों को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
शिक्षकों पर बढ़ रहा अतिरिक्त दबाव
स्कूलों में प्राचार्य के पद रिक्त रहने से शिक्षकों का कार्य विभाजन भी प्रभावित हो रहा है। जी शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाता है, उसे नियमित शिक्षक के अलावा स्कूल संचालक से जुड़े कई काम देखने पड़ते हैं। इससे अन्य शिक्षकों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां आने की स्थिति बनती है। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में रिक्त प्राचार्य पदों को शीघ्र भरा जाना चाहिए। नियमित प्राचार्य की नियुक्ति से स्कूलों का कामकाज व्यवस्थित होगा और शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियों से राहत मिलेगी।
रिटायर और ट्रांसफर से बनी स्थिति
जिले में हर वर्ष कई शिक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं, वहीं कई शिक्षकों का तबादला भी हुआ है। इसके बाद प्राचार्यों की प्रतिस्थापन नहीं हुई है, जिसके कारण प्रभारी के भरोसे कामकाज चल रहा है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित 107 हायर सेकेंडरी और 102 हाई स्कूल में नियमित प्रचार की नियुक्ति नहीं है।
प्रभावित होती है व्यवस्था
शिक्षा व्यवस्था में प्राचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी से लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच समन्वय बनाए रखने तक कई जिम्मेदारियां प्राचार्य के स्तर पर होती हैं। ऐसे में लंबे समय तक नियमित प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने से स्कूलों की व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
इनका कहना है
जिन स्कूलों में नियमित प्रचार नहीं है, वहां वरिष्ठ शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा। उम्मीद है कि जल्द ही व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी।
पवन कुमार सिंह जिला शिक्षा अधिकारी, सीधी
Created On :   10 Oct 2026 5:56 PM IST












