Balram Jayanti 2026: क्या है भगवान बलराम का महत्व, जानिए आसान पूजन विधि

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जयंती (Balram Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से ठीक दो दिन पूर्व आता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान बलराम श्रीकृष्ण के बड़े भाई और ब्रज के राजा के रूप में पूजनीय हैं। भगवान बलराम को प्यार से दाऊ भैया भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में बलराम जी का नाम हलधर भी बताया गया है, इसलिए इस तिथि को हल षष्ठी (Hal Shashthi) के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष बलराम जयंती 16 सितंबर 2026, बुधवार के दिन मनाई जा रही है। आइए जानते हैं इसका महत्व...
कौन हैं भगवान बलराम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बलराम, श्रीकृष्ण के बड़े भाई हैं। उन्हें बल, शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल है, इसलिए उन्हें हलधर और हलायुध भी कहा जाता है। भगवान बलराम का जीवन यह संदेश देता है कि शारीरिक शक्ति के साथ धैर्य, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना भी जरूरी है। कृषि और ग्रामीण जीवन से भी उनका गहरा संबंध माना जाता है। इसी वजह से कई क्षेत्रों में किसान समुदाय के लिए बलराम जयंती का विशेष महत्व है।
बलराम जयंती का क्या है महत्व?
बलराम जयंती केवल भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में ही नहीं, बल्कि शक्ति और मेहनत के सम्मान के पर्व के रूप में भी देखी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान बलराम की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और व्यक्ति को साहस तथा आत्मबल की प्राप्ति होती है। भक्त भगवान से जीवन में सही रास्ते पर चलने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति की प्रार्थना करते हैं। बलराम जी का हल कृषि और धरती से जुड़ा प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए यह पर्व खेती-किसानी और अन्न के महत्व को याद करने का अवसर भी देता है।
इस विधि से करें पूजा
- भैंस के गोबर से घर की दीवार पर छठ माता का चित्र बनाएं, ऐसा संभव ना हो तो आप बाजार से चित्र भी ला सकते हैं।
- ध्यान रहे चित्र में हल, सप्त ऋषि, पशु, किसान आदि बने होते हैं।
- पूजा के दौरान चौकी में एक कलश रख लें।
- इसके बाद गणेश जी के साथ माता पार्वती की तस्वीर स्थापित करें।
- अब एक मिट्टी के कुल्हड़ में ज्वार की धानी और महुआ भर लें।
- इसके बाद छठ माता को फूल, माला, सिंदूर, हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र, आभूषण आदि चढ़ाएं।
- माता को सात प्रकार का अनाज (गेहूं, मक्का, जो, अरहर, मूंग और धान) चढ़ाएं।
- महुआ के पत्ते में महुआ और भैंस के दूध से बने दही को मिलाकर बनाया गया प्रसाद का भोग लगाएं।
- इस दिन भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन करें।
- घी का दीपक और धूप जलाकर छठ माता की कथा का पाठ करें या सुनें।
- विधि विधान से पूजा के बाद आखिर में मां पार्वती की आरती करें।
डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग- अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।
Created On :   16 Sept 2026 7:30 PM IST










