Chaitra Navratri 2026: मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगी जीवन से नकारात्मकता, जानिए पूजा विधि और मंत्र

डिजिटल डेस्क, भोपाल। चैत्र नवरात्रि की सप्त्मी तिथि मां कालरात्रि (Maa Kalratri) को समर्पित है, जो कि मां दुर्गा का ही सातवां स्वरूप हैं। माता को सबसे उग्र और विनाशकारी रूप में देखा जाता है, जो अंधकार, भय और नकारात्मकता का नाश करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखने के साथ ही पूरी श्रद्धा और भक्ति से मां कालरात्रि की आराधना करता है उन पर मां का आशीर्वाद बना रहता है।
मां कालरात्रि की पूजा से नकारात्मक प्रभाव बेअसर होते हैं, यही नहीं इनकी पूजा से भय का भी नाश होता है। आइए जानते हैं कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप, पूजा विधि और मंत्र के बारे में...
मां कारात्रि का स्वरूप
शास्त्रों के अनुसार काला रंग होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया। वहीं इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें "शुभंकारी" भी कहा गया है। माता कालरात्रि तीन नेत्रों वाली माता है। माता अपने विशाल बालों को फैलाए हुए हैं। इनकी चार भुजाएं हैं और सिंह के कंधे पर सवार मां कालरात्रि का विकराल रूप अद्भुत हैं। मां कालरात्रि की सवारी गधा है। देवी कालरात्रि अपने हाथ में चक्र, गदा, तलवार,धनुष,पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किए हुए हैं। वहीं माता माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण किए हुए हैं।
पूजा विधि
- मां कालरात्रि की पूजन से पहले स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें।
- माता की प्रतिमा या फोटो रखें और गंगा जल से स्नान कराएं।
- मां को रोली,अक्षत, दीप, धूप अर्पित करें।
- मां को रातरानी को फूल अर्पित करें।
- मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने व्यंजन (जैसे मालपुए) का भोग लगाएं।
- इसके बाद दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- मां कालरात्रि की आरती करें।
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मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
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Created On :   25 March 2026 5:24 PM IST














