Chaitra Navratri 2026: मां कूष्मांडा पूजा से सूर्य से उत्पन्न दोष होंगे दूर, इन चीजों का लगाएं भोग

डिजिटल डेस्क, भोपाल। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के तीन दिन बीते चुके हैं और चौथा दिन मां कूष्मांडा (Maa Kushmanda) को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा की पूजा और व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है। साथ ही सभी भय से मुक्ति मिलती है और सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषियों के अनुसार, मां कूष्मांडा की पूजा से ग्रहों के राजा सूर्य से उत्पन्न दोष भी दूर होते हैं।
भगवती पुराण के अनुसार, त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सृष्टि की रचना का विचार किया था, लेकिन उस समय सम्पूर्ण ब्रह्मांड शांत था और चारों ओर अंधकार था। ऐसे में त्रिदेव ने सृष्टि की रचना के लिए मां दुर्गा से सहायता मांगी और फिर मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने ही अपनी मधुर मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इनका नाम कुष्मांडा पड़ा। आइए जानते हैं माता का स्वरूप और पूजा विधि...
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मां का चौथा स्वरूप?
देवी के चौथे स्वरूप यानि कि कुष्मांडा माता की आठ भुजाएं हैं। इनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है।
कैसे करें मां कूष्मांडा की पूजा?
- माता की तस्वीर के सामने बैठकर मां कूष्मांडा का ध्यान करें।
- माता को कमल गट्टे, गेंदा या गुलदाउदी के फूल अर्पित करें
- पूजा के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करें।
- मां कूष्मांडा को अपनी उम्र की संख्या के अनुसार हरी इलाइची अर्पित करें और हर इलाइची अर्पित करने के साथ "ॐ बुं बुधाय नमः" का जाप करें।
- इसके बाद सभी इलायची को एकत्रित करके हरे कपड़े में बांधकर नवरात्रि तक अपने पास रखें।
- माता को धूप, दीप, कपूर, फल और मिठाई अर्पित करें।
- इस दिन माता को मालपुए बनाकर विशेष भोग लगाएं।
- इसके बाद आरती करें और प्रसाद परिवार में बांटें।
डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।
Created On :   21 March 2026 6:24 PM IST














