Skand Shashthi 2026: स्कंद षष्ठी व्रत में इस विधि से करें भगवान कार्तिकेय की पूजा, जानिए मुहूर्त और मंत्र

स्कंद षष्ठी व्रत में इस विधि से करें भगवान कार्तिकेय की पूजा, जानिए मुहूर्त और मंत्र
मान्यता है कि, इस दिन संसार में हो रहे कुकर्मों को समाप्त करने के लिए कार्तिकेय का जन्म हुआ था।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी (Skand Shashthi) के रूप में मनाया जाता है, जो कि भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े बेटे भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। खास तौर पर दक्षिण भारत में इस दिन का बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है। मान्यता है कि, इस दिन संसार में हो रहे कुकर्मों को समाप्त करने के लिए कार्तिकेय का जन्म हुआ था।

कुछ प्रचलित कथाओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त हुई थी। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार, स्कंद षष्ठी व्रत के प्रभाव से प्रियव्रत के मृत शिशु के प्राण लौट आए थे। आइए जानते हैं इस तिथि और पूजा विधि के बारे में...

षष्ठी तिथि कब से कब तक

षष्ठी तिथि आरंभ: 23 मार्च 2026, सोमवार की शाम 06 बजकर 38 मिनट से

षष्ठी तिथि समापन: 24 मार्च 2026, मंगलवार की शाम 04 बजकर 07 मिनट तक

पूजा विधि

- घर के मंदिर में सफाई कर गंगा जल का छिड़काव करें।

- इसके बाद दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके भगवान कार्तिकेय की पूजा आरंभ करें।

- पूजा में चंपा के पुष्प को अवश्य शामिल करें।

- इस दिन संपूर्ण शिव परिवार की भी पूजा करें।

- देसी घी का दीपक जलाएं और फल, मिष्ठान का भोग लगाएं।

- वैदिक मंत्रों का जाप करें और आरती करें।

इस मंत्र का जाप करें

देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव। कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥

ॐ शारवाना-भावाया नम: ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।

Created On :   24 March 2026 4:55 PM IST

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