महाशिवरात्रि: पूजा के दौरान जरूर चढ़ाएं बेलपत्र, जानें क्यों हैं शिवजी को पसंद

Mahashivaratri: definitely offer bell leaf during worship, know why Shiva likes
महाशिवरात्रि: पूजा के दौरान जरूर चढ़ाएं बेलपत्र, जानें क्यों हैं शिवजी को पसंद
महाशिवरात्रि: पूजा के दौरान जरूर चढ़ाएं बेलपत्र, जानें क्यों हैं शिवजी को पसंद

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में धूम धाम से मनाया जा रहा है। घर, मंदिर और शिवालयों में भगवान भोलेनाथ की आराधना की जा रही है। भगवान शिव की पूजा में वैसे तो बहुत सी आवश्यक साम्रगी होती है, लेकिन इन सब में बेलपत्र का बड़ा महत्व है। महाशिवरात्रि के दिन या बाकी दिनों में भी भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना काफी शुभ माना जाता है।

माना जाता है कि बेलपत्र से भगवान शिव की विशेष पूजा करने से धन की दिक्कतें हमेशा के लिए दूर हो जाएंगी। पुराणों में भी शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होन बताया गया है। लेकिन बेलपत्र को किस तरह शिवलिंग पर अर्पित किया जाए ये बहुत कम लोगों को मालूम होगा। तो आइए शिवरात्रि के इस मौके पर जानते हैं, बेलपत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी...

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तीन पत्तियों वाला बेलपत्र 
एक पूर्ण बेलपत्र में तीन जुड़ी हुई पत्तियां होती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान शिव को चढ़ाया जाना वाला बेलपत्र तीन पत्तियों वाला ही हो। बेलपत्र में छेद न हो और वो कहीं से भी कटा फटा न हो। सही समय पर तोड़े गए बेलपत्र भी शुभफल देने वाले होते हैं।

बेलपत्र के बाद जल चढ़ाएं
पूजा के दौरान जब भी शिवलिंग को बेलपत्र चढ़ाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि बेल पत्र चढ़ाने के बाद जल जरूर अर्पण करना चाहिए। इसके अलावा बेलपत्र चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप भी करना चाहिए। 

शाम को ना तोड़ें बेल पत्र
शाम के समय और सूर्य उदय से पहले बेलपत्र नहीं तोड़ने चाहिए। इसके अलावा रात्रि काल में बेल पत्र न तोड़ने के विधान है। बेलपत्र हमेशा सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए। सूखे हुए या पीले पड़ चुके बेलपत्र भी नहीं चढ़ाना चाहिए। 

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ऐसे चढ़ाएं शिवलिंग पर बेलपत्र
- सबसे पहले बिना कटे-फटे 11 या 21 बेल पत्र को शुद्ध पानी से साफ कर लीजिए।
- इसके बाद एक कटोरे में गाय का दूध लीजिए, जिसमें आपके स्वच्छ बेलपत्र डाल दीजिए। 
- इसके बाद भगवान शिव की पूजा करें।
- अब आप दूध के कटोरे से बेलपत्र निकाल लीजिए और उन्हें गंगाजल से स्वच्छ कर दीजिए। 
- 11 या 21 बेलपत्र जो आपने स्वच्छ किए है उनके हर पत्ते पर चंदन से ॐ बना दीजिए।
- बेलपत्र पर इत्र छिड़ककर शिवलिंग पर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र  का जाप करते हुए सभी बेल पत्र चढ़ा दीजिए।

इसलिए चढ़ाया जाता है बेलपत्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने हेतु माता पार्वती ने कई प्रकार के जतन किए थे। शिवजी को पाने के लिए माता पार्वती ने कई व्रत भी किए थे। एक दिन भगवान शिव जंगल में बेलपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या कर रहे थे। माता पार्वती जब शिवजी की पूजा के लिए सामग्री लाना भूल गई तो उन्होंने नीचे गिरे हुए बेलपत्र से शिवजी को पूरी तरह ढक दिया। जिससे शिवजी अत्यधिक प्रसन्न हुए। तब से भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाया जाने लगा और माता पार्वती जब भी शिवजी की पूजा करती तो वे शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना बिल्कुल नहीं भूलती।

Created On :   21 Feb 2020 3:21 AM GMT

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