Shardiya Navratri 2026: मां शैलपुत्री की पूजा से जीवन में आएगी सुख-शांति, जानिए पूजा विधि, मंत्र और स्वरूप

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू धर्म में शक्ति के महापर्व शारदीय नवरात्रि (Navratri) का बड़ा महत्व है। इस पर्व के दौरान मां दुर्गा के अलग- अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि, मां शैलपुत्री की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
मां शैलपुत्री को प्रकृति और पृथ्वी से जुड़ी शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री का स्वरूप कैसा है और क्या है पूजा विधि...
मां शैलपुत्री कौन हैं? जानें उनका स्वरूप
देवी के नौ स्वरूपों में मां शैलपुत्री को पहला स्थान प्राप्त है। 'शैल' का अर्थ पर्वत और 'पुत्री' का अर्थ बेटी होता है। इस तरह पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री का संबंध प्रकृति, शक्ति और स्थिरता से है। उनका स्वरूप भक्तों को धैर्य, साहस और जीवन में मजबूती बनाए रखने की प्रेरणा देता है। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है। इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल रहता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है। माता का यह स्वरूप शक्ति, शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
मां शैलपुत्री की इस विधि से करें पूजा
- शारदीय नवरात्रि के पहले दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- अब लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
- मां के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं।
- मां शैलपुत्री को रोली या चंदन का तिलक लगाएं।
- इसके बाद सफेद फूल, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- माता को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति व मंगल की कामना करें।
- अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप करें।
मां शैलपुत्री मंत्र
- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः ।।
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।
Created On :   10 Oct 2026 5:18 PM IST












