Pritam & Pedro OTT: ‘प्रीतम एंड पेड्रो' से ओटीटी डेब्यू, बेटे वीर के लॉन्च पर बोले राजकुमार हिरानी- दर्शक लेक्चर नहीं, मनोरंजन चाहता है

‘प्रीतम एंड पेड्रो से ओटीटी डेब्यू, बेटे वीर के लॉन्च पर बोले राजकुमार हिरानी- दर्शक लेक्चर नहीं, मनोरंजन चाहता है
हिंदी सिनेमा में लगातार सफल फिल्में देने के कारण राजकुमार हिरानी को ‘हिट फिल्मों की मशीन’ कहा जाता है। अब वह पहली बार जियो हॉटस्टार के लिए वेब सीरीज लेकर आ रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। हिंदी सिनेमा में लगातार सफल फिल्में देने के कारण राजकुमार हिरानी को ‘हिट फिल्मों की मशीन’ कहा जाता है। अब वह पहली बार जियो हॉटस्टार के लिए वेब सीरीज लेकर आ रहे हैं, जिसके साथ उनका ओटीटी डेब्यू भी हो रहा है। यह प्रोजेक्ट उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इसी सीरीज से उनके बेटे वीर हिरानी अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं। एक ओर राजकुमार हिरानी डिजिटल मंच पर नई शुरुआत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर वीर अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। ओटीटी डेब्यू, बदलते सिनेमा और बेटे के लॉन्च को लेकर राजकुमार हिरानी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

कहानी सच्ची, किरदार काल्पनिक

राजकुमार हिरानी कहते हैं, ओटीटी एक नई दुनिया है । यह हालांकि कोविड के दिनों में ही यह आपके पास आई है। मैने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कुछ नया प्रयोग करूंगा। हम तो बड़े पर्दे की फिल्में देखकर बड़े हुए हैं। प्रीतम और पेड्रो एक वेब सीरीज है और साइबर क्राइम पर आधारित है। मेरी हर फिल्म एक दूसरे से अलग रही है। सोचा इस बार क्राइम को ह्यूमर के साथ दिखाने की कोशिश करूं तो उस लिहाज से यह मेरे लिए बिल्कुल नया है। मैने कुछ साइबर क्राइम के केस अमित गुप्ता के बुक से लिए हैं लेकिन कहानी के किरदार काल्पनिक हैं जो मैने खुद लिखे हैं।

अडिक्टिव है सोशल मीडिया

साइबर क्राइम सबसे खतरनाक दुनिया है। जब मैं कहानी लिख रहा था तो कई घटनाओं के बारे में जानकर हैरान हुआ। दरअसल मैं खुद सोशल मीडिया इस्तेमाल नहीं करता। इस सीरीज के बारे में पोस्ट करने के लिए मैं खुद सोशल मीडिया पर 3 साल बाद लौटा। बल्कि एक व्यक्ति ने मुझे ताना भी दिया कि सर पासवर्ड कैसे याद रहा ? पर सच में यह रील्स अडिक्टिव हैं। आपको इन्हे देखने की लत लग जाती है। मैंने खुद कई घंटे इसके पीछे बर्बाद किए तो अब मैं जानबूझकर सोशल मीडिया की तरफ जाता ही नहीं।

जिंदगी से चुनता हूं कहानियां

लोगों को मेरे किरदार पसंद आते हैं, लेकिन सच कहूं तो ये सब हमारे आसपास की जिंदगी से ही निकलते हैं। आप सुबह से शाम तक होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं पर गौर करें, तो कई किस्से मिल जाते हैं। एक व्यक्ति मुझे रोज गुड मॉर्निंग के साथ फोन पर गुलाब भेजता है। मजेदार बात यह है कि उस गुलाब का रंग हर दिन अलग होता है। वह अब तक मुझे हजारों फूल भेज चुका है। मैं सोचता हूं कि इस एक संदेश के पीछे वह रोज कितनी मेहनत करता होगा। अब तो मैं उसके मैसेज को पूरा भी नहीं देखता, लेकिन उसका सिलसिला सालों से जारी है। इसी तरह फोन पर जिंदगी का ज्ञान देने वाले और मजेदार संदेश आते रहते हैं। दिन चढ़ते-चढ़ते एक ह्यूमर सीन लिखने लायक काफी सामग्री इकट्ठा हो जाती है। फिर मैं इन्हीं छोटे-छोटे किस्सों को जोड़ता हूं और एक नया सीन तैयार हो जाता है।

100 साल का सिनेमा,सब एक्सप्लोर हो चुका है

हमारा भारतीय सिनेमा 100 साल से ज्यादा पुराना है। हर कहानी कई बार कही जा चुकी है। ऐसा कुछ नहीं बचा जो एक्सप्लोर नहीं हुआ लेकिन मुझे इतना पता है कि आपका दर्शक मनोरंजन के लिए सिनेमाघर में आ रहा है, आपका लेक्चर सुनने नहीं। उसको कहानी में थोड़ा ह्यूमर आपको देना पड़ेगा। पर ऐसा भी नहीं है कि आप लाइन से 50 जोक्स लिखकर उसे हंसा लोगे। उसको कहानी में पिरोना होगा। इसलिए मैं कभी अपने किरदार कॉलेज या अस्पताल भेजकर उनसे ह्यूमर निकालता रहता हूं। हर फिल्म में थोड़ा ह्यूमर होना ही चाहिए।

हर दिन नर्वस होता हूं

इतने पुराने सिनेमा में भी आपको कुछ ही फिल्में मिलेंगी जो अच्छी होंगी और याद रह जाएंगी। इसलिए मैं भी जब फिल्म लिख रहा होता हूं तो नर्वस या घबराया रहता हूं क्योंकि हम तो फ्लो में चीजें लिख देते हैं लेकिन कभी उनके रिपीट होने या जजमेंट का डर रहता है। इसलिए मैं फिल्म की रिलीज के समय दर्शकों की प्रतिक्रिया आने तक घबराया रहता हूं। आज भी मैं यही कहूंगा कि हर जगह अच्छा और बुरा काम होता है। आप हमेशा कोशिश करें कि अच्छी और स्वच्छ कॉमेडी परोसें।

वीर को बनना था एक्टर

प्रीतम एंड पेड्रो से वीर का भी डेब्यू है। हालांकि इससे कई साल पहले वह सर्किट यानी अरशद के साथ स्क्रीन छोटा सर्किट बनाकर स्क्रीन साझा कर चुके हैं लेकिन तब वह बहुत छोटे थे। आज एक फिल्म मेकर की तरह तो नहीं लेकिन पिता के तौर पर थोड़ा नर्वस हूं। जब वीर ने कहा कि उन्हें एक्टर बनना है तो मैंने उन्हें कहा पहले फिल्म असिस्ट करो, इसे सीखो फिर एक्टिंग में जाना।

Created On :   24 Jun 2026 7:17 PM IST

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