World Mental Health Day: चेहरे पर हंसी, अंदर जंग! आमिर से दीपिका तक, सितारों ने बताया मानसिक परेशानी का सच

चेहरे पर हंसी, अंदर जंग! आमिर से दीपिका तक, सितारों ने बताया मानसिक परेशानी का सच
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर बॉलीवुड सितारों की उन कहानियों को जानिए, जो बताती हैं कि शोहरत और कामयाबी के बावजूद मानसिक परेशानियां किसी को भी हो सकती हैं। आमिर खान ने थेरेपी से मिले अनुभव साझा किए, दीपिका पादुकोण ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में पहल की और कुब्रा सैत समेत कई कलाकारों ने अपने संघर्षों पर खुलकर बात की। जानिए, क्यों मानसिक स्वास्थ्य को समझना, चुप्पी तोड़ना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कैमरे के सामने मुस्कुराते चेहरे, बॉक्स ऑफिस पर मिलती कामयाबी और लाखों प्रशंसकों का प्यार। सितारों की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, जरूरी नहीं कि भीतर भी सब कुछ उतना ही आसान हो। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां शोहरत, पैसा या सफलता देखकर नहीं आतीं। बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अपने अनुभव सार्वजनिक कर इस बात को स्वीकारने में मदद की है कि मानसिक परेशानी पर बात करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना सामान्य बात है। 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जानते हैं उन सितारों के बारे में, जिन्होंने इस विषय पर चुप्पी तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

डिप्रेशन के लिए थेरेपी ली है-आमिर खान

अभिनेता आमिर खान अपनी बेटी इरा खान की मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में की जा रही पहल पर गर्व करते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मुझे गर्व है कि इरा यह काम कर रही है। मानसिक बीमारी बेहद खतरनाक बीमारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई इस पर बात ही नहीं करता। लेकिन जिस तरह आपका शरीर इलाज मांगता है, उसी तरह आपके दिमाग को भी ठीक करने की जरूरत पड़ती है, ताकि आपकी जिंदगी बेहतर ढंग से चल सके। आमिर ने बताया कि उन्होंने भी इरा के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया है। अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब उनकी फिल्म फ्लॉप होने के बाद वह डिप्रेशन में थे, तब इस प्रक्रिया से उन्हें काफी मदद मिली। उन्होंने खुद थेरेपी ली और उस तकलीफ से बाहर निकल पाए। आमिर की सलाह है कि लोग मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और इससे जुड़े सामाजिक संकोच को तोड़ें।

डिप्रेशन से संघर्ष को बनाया मुहिम, अब पीवी सिंधु के साथ दीपिका की नई पहल

2014 में डिप्रेशन से जूझने के बाद अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने 2015 में अपने अनुभव सार्वजनिक किए। परिवार और विशेषज्ञों की मदद से उबरने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता और खुली बातचीत जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने ‘द लिव लव लाफ फाउंडेशन’ की स्थापना की। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दीपिका ने अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए ‘फीचर्ड क्लॉजेट्स’ पहल शुरू की है। इसकी पहली सहभागी ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु हैं, जिन्होंने अपने वॉर्डरोब के कपड़े और अन्य सामान चैरिटी सेल के लिए दिए हैं। बिक्री से मिलने वाली राशि फाउंडेशन के मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सहायता कार्यक्रमों पर खर्च होगी।दीपिका ने कहा, ‘ऐसी दुनिया में, जहां लोगों से बिना किसी संघर्ष के मजबूत बने रहने की उम्मीद की जाती है, वहां पीवी की हिम्मत और उपलब्धियां इस पहल में उनके साथ को खास बनाती हैं।’सिंधु ने कहा, “एथलीट्स को अक्सर मानसिक रूप से मजबूत माना जाता है, लेकिन उन पलों के बारे में बात करना भी जरूरी है, जब हम मुश्किलों से जूझ रहे होते हैं।

चौथी क्लास में ही हुई थी डिप्रेशन का शिकार-कुबरा सैत

अभिनेत्री कुब्रा सैत ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि जब मैं चौथी कक्षा में थी, तब किसी से बात करने का मन नहीं करता था। मैं बस खुद को समेटकर सो जाना चाहती थी। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि जिंदगी में कई बार डिप्रेशन से गुजरी, लेकिन तब इसे पहचान नहीं पाई। कुब्रा ने बताया कि परिवार और करीबी दोस्तों को भी गहरे अवसाद से जूझते देख उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को समझने की कोशिश की। नियमित रूप से मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत ने उन्हें अपनी भावनाओं और मन के उतार-चढ़ाव को समझने में मदद की। वह आत्महत्या रोकथाम से जुड़े प्रयासों के जरिए संकट से गुजर रहे लोगों की मदद करने की दिशा में भी काम कर रही हैं। कुब्रा का कहना है कि हर उदासी डिप्रेशन नहीं होती और हर खराब दिन को मानसिक बीमारी का नाम देना सही नहीं है। जरूरी है कि हम अपनी भावनाओं को समझें, खुद पर जल्दबाजी में कोई लेबल न लगाएं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें। वह कहती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना जरूरी है, क्योंकि आप अकेले नहीं हैं, लेकिन अपनी बात कहने और मदद मांगने के लिए पहला कदम खुद उठाना होगा।

सबसे जरूरी है चुप्पी तोड़ना-डॉक्टर सुजय प्रभुगांवकर, मनोचिकित्सक

मनोचिकित्सक डॉक्टर सुजय प्रभुगांवकर के अनुसार उनके पास इलाज के लिए आने वाले कई लोगों के अनुभव अलग-अलग हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला संदेश एक ही है...मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी को कमजोरी मानकर छिपाना नहीं चाहिए। किसी की कामयाबी या मुस्कान देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भीतर से कैसा महसूस कर रहा है। वह मुझसे जितनी बातें साझा कर लेते हैं उतनी वह खुद अपने पार्टनर से साझा नहीं कर पाते। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जरूरत है कि हम अपनी और दूसरों की भावनात्मक तकलीफ को गंभीरता से लें, पहले अपनों की बात सुनें और आवश्यकता होने पर योग्य विशेषज्ञ की मदद लें।

यह भी रहे मानसिक तनाव में...

- वरुण धवन: 2015 में वरुण ने बताया था कि फिल्म ‘बदलापुर’ की शूटिंग के दौरान वह काफी उदास रहने लगे थे और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने पर उन्होंने डॉक्टर की मदद ली, हालांकि उन्होंने बताया कि उन्हें इलाज से डिप्रेशन के इलाज का खास फायदा नहीं हुआ था।

- परिणीति चोपड़ा: लगातार दो फिल्मों के असफल होने और निजी जीवन में मुश्किलों के बाद परिणीति डिप्रेशन से गुजरीं। उस दौर में उनके भाई सहज ने उनका साथ दिया।

- इलियाना डिक्रूज: इलियाना ने बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर, डिप्रेशन और पैनिक अटैक से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात की थी।वह भी डिप्रेशन से गुजर चुकी हैं।

- करण जौहर: करण जौहर ने चिंता और पैनिक अटैक के अपने अनुभव साझा किए और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर सोशल मीडिया पर चर्चा की थी।

- टाइगर श्रॉफ: फिल्म ‘ए फ्लाइंग जट्ट’ के अपेक्षित प्रदर्शन न करने के बाद टाइगर ने एक महीने तक गहरे भावनात्मक संघर्ष और प्रेरणा की कमी महसूस करने की बात एक इंटरव्यू में कही थी।

- यो यो हनी सिंह: रैपर हनी सिंह ने अपने जीवन के मुश्किल दौर में बाइपोलर डिसऑर्डर, शराब की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने की बात सार्वजनिक रूप से साझा की है।

Created On :   9 Oct 2026 6:34 PM IST

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