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कोरोना के बीच फुटबॉल: 'ला लिगा' तीन महीने बाद दोबारा शुरू, पहले मैच में सेविला ने रियाल बेटिस को 2-0 से हराया

कोरोना के बीच फुटबॉल: 'ला लिगा' तीन महीने बाद दोबारा शुरू, पहले मैच में सेविला ने रियाल बेटिस को 2-0 से हराया

हाईलाइट

  • 'ला लिगा' तीन महीने बाद फिर से शुरू, कोरोना के कारण मार्च में लीग को बीच में ही रोक दिया गया था
  • पहले मैच में सेविला ने रियाल बेटिस को 2-0 से हराया, बिना दर्शकों के खाली स्टेडियम में खेला गया मैच

डिजिटल डेस्क। स्पेनिश फुटबॉल लीग 'ला लिगा' तीन महीने बाद फिर से शुरू हो गई है। कोरोनावायरस महामारी के कारण मार्च में लीग को बीच में ही रोक दिया गया था। लीग के दोबारा शुरू होने पर गुरुवार को पहला मैच सेविला और रियाल बेटिस के बीच बिना दर्शकों के खाली स्टेडियम में खेला गया। मैच में सेविला ने रियाल बेटिस को 2-0 से हराया। 

होम टीम सेविला ने पूरे मैच में रियाल बेटिस पर दबदबा कायम रखा। सेविला के लिए लुकास ओकैम्पोस ने 56वें मिनट में पेनल्टी के जरिए पहला गोल दागा और टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके 6 मिनट बाद ही फर्नांडो ने दूसरा गोल करते हुए टीम को 2-0 से आगे कर दिया। इस गोल में भी लुकास ने असिस्ट किया। बता दें कि लीग का पिछला मैच 11 मार्च को आइबर और रियाल सोसिडाड के बीच खेला गया था। इस मैच में सोसिडाड ने आइबर को 2-1 से हराया था। 

इस जीत के साथ ही सेविला पॉइंट्स टेबल में 50 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर पहुंच गई है। सेविला ने लीग में अब तक 27 मैच खेले हैं। जिसमें से 14 मैच जीते हैं। पॉइंट्स के मामले में सेविला टीम रियाल मैड्रिड से सिर्फ 6 अंक पीछे है। बता दें कि बार्सिलोना 27 मैचों में 58 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में टॉप पर है। वहीं रियाल मैड्रिड 27 मैचों में 56 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद है। बार्सिलोना शनिवार को मैलोर्का के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेगी। जबकि रियाल मैड्रिड रविवार को आइबर से भिड़ेगी। 

बता दें कि मैच से पहले नियमों का पालन न करते हुए बड़ी संख्या में दोनों टीमों के फैंस स्टेडियम के बाहर इकठ्ठा हो गए थे। वह भले ही स्टेडियम के अंदर नहीं जा पाए, लेकिन उन्हें देश में फुटबॉल की वापसी की बहुत खुशी थी। मैच से ठीक पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए 1 मिनट का मौन रखा था। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।