माटी का कर्ज और चिकित्सा का फर्ज: डॉ. विजय प्रकाश की प्रेरणादायी जीवन यात्रा

माटी का कर्ज और चिकित्सा का फर्ज: डॉ. विजय प्रकाश की प्रेरणादायी जीवन यात्रा
पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश

पटना (बिहार), 24 जून: एक योग्य व्यक्ति सिर्फ अपने लिए कामयाबी के रास्ते नहीं खोलता, बल्कि अपनी बनाई संस्थाओं और शिष्यों के जरिए आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य संवार देता है। चिकित्सा जगत में एक ऐसा ही प्रतिष्ठित नाम है—पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश। पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) में 32 वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर देश को सैकड़ों दिग्गज डॉक्टर सौंपने वाले डॉ. विजय प्रकाश आज भी चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं।

चाहते तो वे देश-दुनिया के किसी भी कोने में अपनी चमक बिखेर सकते थे, लेकिन अपनी माटी और मातृ संस्थान (PMCH) के प्रति गहरा लगाव उन्हें वापस बिहार खींच लाया।

अभावों से 'नेतरहाट' और 'गोल्ड मेडल' तक का सफर

19 फरवरी 1954 को बांका के एक सरकारी अस्पताल में जन्मे विजय प्रकाश के पिता रामदत्त सिंह पुलिस विभाग में सहायक उप-निरीक्षक (ASI) थे। बार-बार होने वाले तबादलों के बीच बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए उनके पिता ने परिवार को कहलगांव के एक शांत गांव में ठहराया। मकसद साफ था—बच्चों को इतनी मजबूत शिक्षा देना कि वे ग्रामीण पृष्ठभूमि के पिछड़ेपन को पीछे छोड़ सकें।

विजय प्रकाश ने पिता के इस सपने को अक्षुण्ण रखा। वे हर कक्षा में अव्वल आते रहे। इसके बाद उन्होंने बिहार के गौरव कहे जाने वाले 'नेतरहाट स्कूल' की प्रवेश परीक्षा में पूरे राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया। 1971 में वे इस स्कूल के 'बेस्ट आउटगोइंग स्टूडेंट' चुने गए। सफलता का यह कारवां यहीं नहीं रुका; सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से यूनिवर्सिटी टॉपर बनने के बाद उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) में दाखिला लिया। यहाँ से उन्होंने कई विषयों में गोल्ड मेडल हासिल किए और 1978 में एक बार फिर 'बेस्ट आउटगोइंग स्टूडेंट' का खिताब अपने नाम किया।

> दिल का रिश्ता भी यहीं जुड़ा: PMCH के इसी दौर में उनकी मुलाकात अपनी जीवनसंगिनी 'रश्मि' से हुई, जो कॉलेज में उनसे एक साल जूनियर थीं।

राष्ट्रीय पटल से लंदन तक का कीर्तिमान

अखिल भारतीय परीक्षा पास कर डॉ. विजय प्रकाश ने प्रतिष्ठित पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ से एमडी (MD) की पढ़ाई पूरी की और वहाँ भी ब्रांच टॉपर रहे। 27 जुलाई 1984 को वे इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), पटना के सबसे पहले डॉक्टर बने।

इसके बाद 1988 में वे उच्च शिक्षा के लिए यूके (UK) गए, जहाँ उन्होंने महज चार महीने के रिकॉर्ड समय में MRCP की परीक्षा पास कर सबको हैरान कर दिया।

चिकित्सा का 'पारिवारिक कल्पवृक्ष'

फरवरी 2021 में PMCH के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी, डॉ. प्रकाश थमे नहीं। उन्होंने पटना में 'बिग अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल' की स्थापना की, ताकि आम लोगों को किफायती दर पर विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशलिटी इलाज मिल सके।

खास बात यह है कि उनका पूरा परिवार आज चिकित्सा के जरिए समाज सेवा में जुटा है:

* *डॉ. रश्मि (पत्नी):*वर्तमान में PMCH में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष हैं। रवि (पुत्र): अस्पताल के प्रशासनिक व पेशेवर कार्यों में पिता का हाथ बंटाते हैं।

* डॉ. रितु (पुत्री) एवं डॉ. साकेत (दामाद): IGIMS, पटना में क्रमशः क्रिटिकल केयर और जीआई सर्जरी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

राष्ट्रपति से मिला 'पद्मश्री' का गौरव

डॉ. विजय प्रकाश देश के उन गिने-चुने डॉक्टरों में शामिल हैं, जिन्होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की एग्जीक्यूटिव काउंसिल और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBE) की गवर्निंग काउंसिल में अपनी सेवाएं दी हैं।

चिकित्सा और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में उनके इसी अभूतपूर्व योगदान के लिए वर्ष 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा था। 69 वर्ष की आयु पार कर चुके डॉ. विजय प्रकाश आज भी उसी ऊर्जा के साथ सक्रिय हैं, और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचने की ओर अग्रसर हैं।

Created On :   24 Jun 2026 4:59 PM IST

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