Michel Danino on ncert book controversy: यूएन एजेंसी की चेतावनी आने वाले वर्षों में और गर्म होगी धरती, टूटेगा रिकॉर्ड

यूएन एजेंसी की चेतावनी आने वाले वर्षों में और गर्म होगी धरती, टूटेगा रिकॉर्ड
संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ वर्षों में गर्मी और बढ़ेगी। वैश्विक तापमान में पहले मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज होगी जिससे पुराने रिकॉर्ड टूटेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की वर्तमान गति वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ वर्षों में गर्मी और बढ़ेगी। वैश्विक तापमान में पहले मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज होगी जिससे पुराने रिकॉर्ड टूटेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की वर्तमान गति वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, 2015 के बाद से अब तक के सभी 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं और यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहने की संभावना है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2031 से पहले एक नया सबसे गर्म वर्ष दर्ज हो सकता है।

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले (1850–1900) के स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इस बात की लगभग 75 प्रतिशत संभावना है कि इन पांच वर्षों का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार कर जाएगा।

इसके अलावा, 91 प्रतिशत संभावना है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जब तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 के अंत में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे 2027 में नया तापमान रिकॉर्ड बनने का खतरा बढ़ सकता है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान और वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।

पिछले वर्षों में अल नीनो ने 2023 और 2024 को रिकॉर्ड गर्म वर्षों में बदलने में भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से कई गुना अधिक गर्म हो सकता है। इसके अलावा दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और सूखे के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेरिस जलवायु समझौते के तहत तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, हालांकि अस्थायी रूप से इसका पार होना अब अधिक संभव माना जा रहा है।

रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है, जिससे ऊर्जा नीति और वैश्विक पर्यावरण रणनीतियों पर दबाव बढ़ेगा।

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Created On :   28 May 2026 5:24 PM IST

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