Middle East Tension: डिस्काउंट समाप्त, भारत को मजबूरी में खरीदना पड़ेगा महंगा रूसी तेल, ताजा रिपोर्ट में खुलासा

डिस्काउंट समाप्त, भारत को मजबूरी में खरीदना पड़ेगा महंगा रूसी तेल, ताजा रिपोर्ट में खुलासा
मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इससे तेल सप्लाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसी कारण भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक बार फिर बढ़ गई है। भारत रूस का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इससे तेल सप्लाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसी कारण भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक बार फिर बढ़ गई है। भारत रूस का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। खासबात यह है कि पहले भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अब उसे इसका दाम अधिक चुकाना पड़ेगा। यानी प्रीमियम दाम पर खरीदना पड़ रहा है।

मंत्रालय ने तेल आयात पर क्या कहा?

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ताजा आंकड़े जारी किए है। जिसमें बताया गया है कि अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद मार्च, 2026 में भारत तेल आयात में रूस की भागीदारी 33.3 प्रतिशत बढ़ी है। यानी करीब एक-तिहाई रही है। इसी दौरान खाड़ी देशों से तेल आयात में भारी गिरावट देखने को मिली है। ऐसा इसलिए कि स्ट्रटे ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था। आगे बताया गया है कि मार्च के महिने में रूस से भारत ने प्रतिदिन करीब 20 लखा बैरल कच्चा तेल खरीदा है।

हालांकि, अप्रैल, 2026 में रूसी तेल आयात में गिरावट आई है। जिसकी वजह से भारत में रिफाइनरी मेंटेनेंस और रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन द्वारा किए गए हमले शामिल है।

रूस से क्यों खरीदना शुरू किया तेल?

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी, 2022 में युद्ध शुरू हुआ था तो रूस ने अपने तेल प्रतिबंधो को ध्यान में रखते हुए भारत जैसे सहयोगियों को भारी डिस्काउंट ऑफर किया था। उस समय भारत रूस से बहुत ही कम तेल खरीदता था। लेकिन उस युद्ध की वजह से तेल के दाम काफी ऊपर जा रहे थे। इसी को देखते हुए भारत ने रूस के साथ तेल खरीदना शुरू किया था। इस दौरान भारत की रिफाइनरियों को रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले 8-10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलने लगा था, लेकिन अब हालात अगल नजर आ रहे हैं।

16 मई की डेडलाइन

पश्चिम एशिया में सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित हुई है। इस वजह से तेल की कीमतें बढ़ने लगी है। इन्हीं को देखते हुए अमेरिका ने 16 मई तक रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट दी है। इस वजह से रूसी तेल की मांग काफी बढ़ गई है। इस मांग के बीच रूस ने डिस्काउंट तो समाप्त कर दिया और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।

Created On :   6 May 2026 8:47 PM IST

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