भारतीय विदेश मंत्रालय की तीखी प्रतिक्रिया: H-1B वीजा पर भारत ने अमेरिका को घेरा, जेडी वेंस की टिप्पणी को बताया अपमानजनक

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की H-1B वीजाधारकों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भारत ने तीखा पलटवार किया है। भारत ने उनके बयान को बेहद अपमानजनक और गलत बताया है। साथ ही कहा कि अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स उच्च शिक्षित और कुशल हैं। वे वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में योगदान देते हैं। यह बयान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिया है।
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अमेरिका को दिया जवाब
मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणी के बारे में हमारा मानना है कि ऐसे बयान गलत और अपमानजनक हैं। असल में अमेरिका का इतिहास खुद प्रवासियों की पीढ़ियों ने ही बनाया है, जिनके काम और इनोवेशन ने इसके विकास और समृद्धि में योगदान दिया है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत ही अपमानजनक है, जिनमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत के अर्थ छिपे हों।"
PERM पर भारत की प्रतिक्रिया
परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम को लेकर रणधीर जायसवाल ने बताया, "हमें कुछ कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम, जिसे PERM के नाम से जाना जाता है, के बारे में अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले की जानकारी है। इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि PERM, H-1B वीजा प्रोग्राम से अलग है।"
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उन्होंने आगे कहा, "PERM आवेदनों के निलंबन से H-1B वीजा की वैधता या H-1B वीजाधारकों और उनके आश्रितों के स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ता है। हालांकि, इसका पात्र कर्मचारियों के लिए कंपनियों की ओर से स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रतिभाओं की आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। जहां यह भारतीयों के लिए अवसर पैदा करती है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी अत्याधुनिक प्रतिभाओं, इनोवेशन, रिसर्च, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन तक पहुंच देकर लाभ पहुंचाती है।"
स्टेकहोल्डर्स करेंगे सराहना
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, "अमेरिका में शेयरधारकों की संपत्ति बढ़ाने के अलावा, यह दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभ का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया में सभी हितधारक इसकी सराहना करेंगे। सच तो यह है कि अमेरिका के बताए गए कदम दोनों देशों के साझा सपनों को आगे नहीं बढ़ाते हैं। हम इस खास मुद्दे पर हो रहे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।"
बताते चलें कि जेडी वेंस ने H-1B वीजाधारकों और विदेशी तकनीकी पेशेवरों को विदेशी बंधुआ मजदूर बताया था। इसके बाद भारत ने यह प्रतिक्रिया दी है।
Created On :   9 Oct 2026 9:00 PM IST













