दैनिक भास्कर हिंदी: Covid-19: क्या कोरोना वायरस के सहारे सुपर पॉवर बनने की ओर बढ़ रहा 'चीन'

April 13th, 2020

हाईलाइट

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार-कारोबार पूरी तरह से ठप्प पड़ा है
  • चीन में लॉकडाउन नहीं है और वहां व्यापार और कारोबार भी चल रहा
  • वर्तमान में अमेरिका सुपर पॉवर देश, लेकिन वहां सबसे ज्यादा संक्रमण और मृतक

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि कर रही है। कोरोना संक्रमण के कारण 210 देशों में अब तक 1 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 18 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। कई ऐसे देश भी हैं जहां कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह तक नहीं बची है। इन हालातों में दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन कर रखा है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार-कारोबार पूरी तरह से ठप्प पड़ा है। वहीं चीन एक मात्र ऐसा देश है, जहां लॉकडाउन भी हटा लिया गया है और वहां के शहरों में व्यापार और कारोबार भी सुचारु रूप से चल रहा है। यही नहीं चीन अब दूसरे देशों में मेडिकल एक्यूप्मेंट्स भी सप्लाई कर रहा है।  

बता दें कि कोरोना वायरस चीन के वु​हान शहर से फैलना शुरू हुआ था। गौर करने वाली बात ये है कि चीन कोरोना वायरसे पूरी तरह उबरता नजर आ रहा हैं। यहां अब तक 82,052 संक्रमित हुए हैं और इनमें से 77,575 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 3,339 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि रविवार को चीन में 99 नए संक्रमित लोग मिले हैं, लेकिन बीते सप्ताह में यहां एक भी कोरोना संक्रमण से मौत का मामला सामने नहीं आया है। वहीं मुकाबले अमेरिका, स्पेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन ईरान और तुर्की जैसे सशक्त देशों में हर दिन हजारों की संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। इन देशों में मौत का भी आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। चूंकि इन आंकड़ों के अनुसार चीन में अब केवल 1,138 लोग संक्रमित बचे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चीन ने कोरोना वायरस पर पूरी तरह काबू पा लिया है और अब वह पूरी दुनिया को नेतृत्व करने के लिए तैयार है या यूं कहें कि सुपर पॉवर बनने को तैयार है। भा​स्कर हिंदी आपको बता रहा है ऐसे ही कुछ फैक्ट्स, जो चीन के सुपर पॉवर बनने की ओर इशारा करते हैं...

WHO ने लॉकडाउन जारी रखने की वकालत की जबकि चीन के बाजार खुले
WHO ने शुक्रवार को चेताया था कि अगर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियां जल्दबाजी में खत्म की गईं तो इसके घातक परिणाम हो सकते हैं। रॉयटर्स के मुताबिक WHO के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयासस ने जिनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हर किसी की तरह WHO भी पाबंदियां खत्म होते देखना चाहता है। लेकिन, जल्दबाजी में पाबंदियां खत्म करने से घातक परिणाम हो सकते हैं। WHO एक ओर दुनियाभर के देशों से लॉकडाउन न हटाने की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरी और चीन ने वुहान से लॉकडाउन हटा लिया है और चीन के बाजार भी खुले हैं। यह बात भी कई देशों को खटक रही है।

स्पेन और तुर्की में मेडिकल एक्यूप्मेंट्स को लेकर तनातनी
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार स्पेन कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देशों में से एक है। यहां अब तक 1,66,019 लोग संक्रमित हुए हैं और 16,972 लोग कोरोना संक्रमण से मर चुके हैं। ऐसे में स्पेन को मेडिकल एक्यूप्मेंट्स की सख्त जरूरत है, लेकिन स्पेन की मेडिकल संसाधन जुटाने की कोशिश में तुर्की सरकार से उसकी तनातनी बीच में आ गई। नतीजा ये हुआ कि स्पेन के 3 हेल्थ ट्रस्ट ने सैकड़ों वेंटिलेटर्स की जो खेप खरीदी थी, उनसे लदे हुए जहाजों को तुर्की की सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। स्पेन के मीडिया ने अपनी सरकार के हवाले से तुर्की की इस करतूत को 'चोरी' करार दिया। करीब एक हफ्ते की खींचतान के बाद स्पेन ने अपने मेडिकल उपकरणों से लदे जहाज, तुर्की के शिकंजे से छुड़ा लिए। यह घटना इस बात की की ओर इशारा करती है कि किस तरह कोरोना वायरस के कारण दुनिया के तमाम हिस्सों में कूटनीतिक तनाव को जन्म दे रहा है।

अमेरिका का चीन और डब्ल्यूएचओ पर मिली भगत का आरोप
आज अमेरिका में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों और मृतकों दोनों की संख्या सबसे ज्यादा है। कोरोना वायरस को लेकर अमरीका और चीन के बीच कूटनीतिक बयानबाजी को दुनिया भर में ज्यादा तवज्जो दी जा रही है। खासतौर से जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप लगाया कि वो चीन के इशारे पर चल रहा है और अमरीका अब विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिया जाने वाला फंड रोकने पर विचार कर रहा है। भले ही चीन पर ये आरोप लग रहे हैं कि उसने कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या छुपाई है, फिर भी, कोविड-19 से जुड़े हर कूटनीतिक संघर्ष का ताल्लुक चीन से हो ये भी जरूरी नहीं।

मिलकर लड़ने की बजाए देशों ने निजी हितों को साधा
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के इंस्टिट्यूट ऑफ ग्लोबल अफेयर्स की सोफिया गैस्टन ने बताया कि इस महामारी के वक्त तमाम देशों से ये उम्मीद थी कि वो इसे साझा चुनौती मान कर आपस में सहयोग करेंगे, ताकि इस संकट का मुकाबला कर सकें। लेकिन, तमाम देश अपने निजी हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं और सहयोग के बजाय एक-दूसरे से होड़ में लग गए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट अनुसार इस बात की एक मिसाल यूरोपीय देशों की एकता में पड़ी दरार भी है। जब इटली में कोविड-19 के संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े, तो इटली ने अपने पड़ोसी देशों से अपील की कि वो मेडिकल संसाधन मुहैया कराने में उसकी मदद करें, लेकिन इटली के दो बड़े पड़ोसियों जर्मनी और फ्रांस ने अपने यहां से ऐसे उत्पादनों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी। यूरोपीय यूनियन के मुख्यालय ब्रसेल्स में इटली के राजदूत मॉरिजियो मसारी ने पॉलिटिको नाम की वेबसाइट में लिखा कि निश्चित रूप से ये यूरोपीय एकता के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

फंड जुटाने के विरोध में खड़ा हुआ जर्मनी  
एक प्रस्ताव आया था कि कोरोना वायरस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित देशों की मदद के लिए चंदा जुटाकर एक फंड बनाया जाए, लेकिन जर्मनी इसका विरोध करने वाले देशों में शामिल हो गया है। जर्मनी के अलावा नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया और फिनलैंड ने भी कोविड-19 प्रभावित देशों की मदद के लिए फंड जुटाने के इस प्रस्ताव का खुल कर विरोध किया था। जबकि स्पेन, फ्रांस, बेल्जियम, यूनान, आयरलैंड, पुर्तगाल, स्लोवेनिया और लक्जमबर्ग ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

चीन की मास्क कूटनीति
बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि इटली, चीन की 'मास्क डिप्लोमैसी' को समझने के लिए भी एक मिसाल है। अपनी सीमाओं के भीतर कोरोना वायरस का प्रकोप थामने के बाद, अब चीन कई देशों को वो संसाधन मुहैया करा रहा है, जो इस वायरस का प्रकोप थामने में मददगार साबित हो सकते हैं। चीन की ऐसी मदद रूस को भी मिल रही है। इसी तरह इटली को भी चीन ने मेडिकल उपकरण और टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई हैं। साथ ही साथ चीन ने अपने डॉक्टरों का एक दल भी इटली भेजा है, जिन्हें इटली में हीरो की तरह देखा जा रहा है। इटली के सोशल मीडिया पर #grazieCina या शुक्रिया चीन हैशटैग कई दिन तक ट्रेंड करता रहा।

अमेरीका फर्स्ट की नीति से अन्य देशों में नाराजगी
गेसू एंतोनियों बाएज, पैक्स टेकम नाम की एक कंसलटेंसी फ़र्म के कार्यकारी निदेशक हैं। लंदन स्थित ये कंपनी कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विकास के मुद्दों से जुड़ी सेवाएं देती है। बाएज कहते हैं कि चीन आज अमेरीका की ओर से खाली किए गए कूटनीतिक स्थान को इस वैश्विक संकट के दौरान भरने की धूर्त कोशिश कर रहा है। ये हालात इसलिए और बिगड़े हैं, क्योंकि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, 2016 में सत्ता में आने के बाद से ही 'अमेरीका फर्स्ट' की नीति पर चल रहे हैं। वैसे भी देखें तो अमेरीका का रवैया किसी के साथ सहयोग का नहीं दिखता है। 

अमेरीका का दवाई के लिए अन्य देशों पर बनाना 
चीन के साथ तनातनी के अलावा, ट्रंप सरकार ने पुराने सहयोगी जर्मनी को उस वक्त बहुत नाराज कर दिया, जब उन्होंने एक जर्मन दवा कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे कोविड-19 के टीके के विशेषाधिकार हासिल करने की कोशिश की। हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत को भी चेतावनी दी थी कि अगर उसने मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के निर्यात पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया तो अमेरीका भी भारत पर पलटवार करेगा, क्योंकि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन को कोविड-19 के इलाज के लिए भी जांचा जा रहा है।

चीन को दुनिया के सामने ​हीरो बनने का मौका मिला
बाएज कहते हैं कि इस वैश्विक महामारी के संकट के दौरान अमरीका ने एक कूटनीतिक महाशक्ति के तौर पर दखल नहीं दिया है और इसी वजह से चीन को विश्व कूटनीति में अमेरीका के खाली किए हुए स्थान को भरने का मौका मिल गया है। लेकिन, चीन की 'मास्क कूटनीति' की राह इतनी आसान भी नहीं है। इसकी एक मिसाल ब्राजील है। दुनिया के ज्यादातर देश आम तौर पर यही मानते हैं कि चीन कोरोना वायरस के प्रकोप को सही समय पर सही तरीके से रोकने में नाकाम रहा। इस कारण से चीन के प्रति कई देशों में नाराजगी भी है।

चीन का प्रचार तंत्र देश की छवि बेहतर करने का अभियान में जुटा
सोफिया गैस्टन ने अमेरीकी खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया कि चीन अपने यहां कोविड-19 के संक्रमण के मामले छुपा रहा है। ब्रिटिश अधिकारियों ने भी चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों की संख्या पर सवाल उठाए हैं। सोफिया गैस्टन कहती हैं कि कोरोना वायरस को लेकर चीन पर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं, लेकिन चीन का प्रचार तंत्र अपने देश की छवि बेहतर करने का अभियान चला रहा है। जैसे-जैसे हम चीन में कोविड-19 के असल आंकड़ों के बारे में जानेंगे, वैसे-वैसे दुनिया में चीन के प्रति नाराजगी बढ़ेगी।

चीन और ब्राजील के बीच पर झगड़ा
कोरोना वायरस से निपटने के चीन के तौर तरीके पर ब्राजील ने भी सवाल उठाए हैं। जब से कोरोना वायरस की महामारी फैली है, तब से ब्राजील और चीन के बीच कई बार तनातनी हो चुकी है। एक बार तो हालात इस स्तर पर पहुंच गए थे कि ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के करीबी अधिकारी और चीन के कूटनीतिक अधिकारी सोशल मीडिया पर खुलेआम एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे। ब्राजील के अधिकारी चीन से वेंटिलेटर और दूसरे स्वास्थ्य उपकरण हासिल करने में संघर्ष कर रहे थे। इसी दौरान शिक्षा मंत्री अब्राहम वीनट्रॉब का ट्वीट आ गया, जिसने पहले से चल रहे तनाव को और भी बढ़ा दिया।

कोलंबिया और वेनेजुएला के बीच भड़की कूटनीतिक संघर्ष की आग
बीबीसी के अनुसार बाएज कहते हैं कि वायरस के प्रकोप से पहले से चल रहे कूटनीतिक संघर्ष की आग और भड़क उठी है। जैसे कि लैटिन अमेरीका के दो पड़ोसी देशों कोलंबिया और वेनेजुएला के बीच। कोलंबिया की सरकार वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार को मान्यता नहीं देती है। वेनेजुएला से भाग कर कोलंबिया जा रहे प्रवासियों की बड़ी संख्या को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। 

कतर और मिस्र के बीच 
बीबीसी के अनुसार मध्य पूर्व में कतर में फंसे मिस्र के नागरिकों के भविष्य को लेकर दोनों देशों में तनातनी बढ़ गई थी। कतर में इस समय मध्य-पूर्व के देशों में कोरोना वायरस के सबसे अधिक मरीज हैं। मिस्र, उन अरब देशों में से एक है जिन्होंने 2017 के बाद से कतर से सभी राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं। कतर पर इन देशों ने आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है।

मास्क और लॉकडाउन के अलावा भी बहस के कई मुद्दे हैं
दुनिया के कई देशों के बीच केवल मास्क और लॉकडाउन को लेकर ही तनातनी नहीं हो रही है। 18 मार्च को यूरोपीय यूनियन की एक रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई कि रूस के प्रभाव में चल रहे मीडिया संस्थान कोविड-19 वायरस को लेकर पश्चिमी देशों की छवि बिगाड़ने का अभियान चला रहे हैं। रूस की सरकार के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों को आधारहीन करार दिया। अगर, दुनिया के तमाम देशों के बीच टकराव बढ़ रहा है, तो कई रिपोर्ट में कुछ देशों के बीच महामारी के दौरान आपसी सामंस्य बढ़ने की तारीफ भी हो रही है।

विकसित देश ही हमेशा सही नहीं होते: अनालिसा
ओवरसीज डेवेलपमेंट इंस्टीट्यूट नाम के थिंक टैंक की रिसर्चर अनालिसा प्रिजॉन कहना है कि इस महामारी के संकट से देशों के बीच आपसी सहयोग के नए अवसर भी सामने आए हैं। उनका कहना है कि इस संकट से एक बात साबित हो रही है कि विकसित देश ही हमेशा सही नहीं होते। वो हर मुद्दे के विशेषज्ञ नहीं हैं। अनालिसा कहती हैं कि जिस तरह चीन ने इस वायरस के प्रकोप को रोकने के अपने अनुभव से इटली की मदद की है, वो इस बात की एक और सटीक मिसाल है। ​अनालिसा के इस तथ्य से जाहिर होता है कि अमेरिका कोरोना वायरस को लेकर दुनिया के सामने सबसे बढ़ा फैलियर साबित हुआ है। इस बात का गवाह वहां के संक्रमित आंकड़े भी देते हैं 

कई देशों के पहले से तनाव के शिकार संबंधों को और बिगाड़ रहे हैं
वहीं सोफिया गैस्टन अभी भी यही मानती हैं कि दुनिया के तमाम देशों के बीच इस महामारी से निपटने के लिए और सहयोग की जरूरत है। उनका कहना है कि अभी तक सभी देश आपसी सहयोग बढ़ाने के अवसर गंवा रहे हैं। खास तौर से पश्चिमी देशों में राष्ट्रवाद और जनवादी आंदोलनों के दबाव में ऐसा हो रहा है। जबकि ये समय सहयोग की शक्ति को दिखाने का है, लेकिन इसकी जगह ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं, जो कई देशों के पहले से तनाव के शिकार संबंधों को और बिगाड़ रही हैं।