भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले: USCIRF ने की RSS पर बैन लगाने की मांग, ट्रंप सरकार से की संघ नेताओं से दूरी बनाने की अपील

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आरएसएस चीफ मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिकी दौरे से पहले यूएस में संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है। अमेरिका की धार्मिक आजादी पर काम करने वाली सलाहकार संस्था(Advisory body) यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम के अधिकारियों ने सरकार से ये मांग की है।
USCIRF चीफ आसिफ महमूद ने भारतीय पीएम मोदी को इसी संघ का सदस्य होना बताया। उन्होंने आरएसएस को एक 'अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन' बताते हुए उससे सहयोगी गुटों की ओर से धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगाए।
यह भी पढ़े -बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप उलटफेर का शिकार हुए लक्ष्य सेन, हार के साथ टूर्नामेंट में सफर समाप्त
USCIRF आयुक्त जीन मिल्स ने भी अमेरिका की ट्रंप सरकार से आरएसएस और उनके सदस्यों पर बैन लगाने की मांग की है, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। USCIRF ने आसिफ महमूद और जीन मिल्स के बयानों को एक्स अकाउंट पर साझा किया है।
भागवत के दौरे से पहले एडवोकेसी ग्रुप 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' ने कहा कि उनके दौरे को मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ आरएसएस नेटवर्क से जुड़े हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस एडवोकेसी ग्रुप ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि 'एकता' का उत्सव धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।
आपको बता दें भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' की ओर से आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' (एकता का उत्सव) में शामिल होने वाले हैं। USCIRF की ये टिप्पणियां भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ हफ्ते पहले आई हैं।
USCIRF ने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि वह RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान न दे और न ही उनके साथ किसी भी तरह की उच्च स्तरीय बैठक करे। भारत की ओर से भी इससे पहले USCIRF की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और वैचारिक पूर्वाग्रह पर आधारित बताते हुए खारिज किया गया।
धार्मिक सलाहकार संस्था USCIRF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। ये रिपोर्ट में मार्च में सामने आई थी। संस्था ने आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) सहित कुछ विशेष लोगों और संस्थाओं पर लक्षित प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया गया था। यूएस संस्था ने इन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
Created On :   20 Aug 2026 10:09 AM IST










