Chandrayaan-4 and 5: ISRO चीफ ने चंद्रयान- 4 और 5 के मिशन को लेकर बड़ी खुशखबरी दी, चांद से सैंपले लेकर वापस लाने की बना रहे योजना

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इसरो (ISRO) चीफ वी. नारायणन ने देश के अंतरिक्ष मिशनों को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है, जिसमें चंद्रयान-4 और 5 के मेगा प्लान शामिल हैं। इसरो अब चांद पर तिरंगा लहराने के बाद वहां से मिट्टी और पत्थर लाने की तैयारी में है। चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 का पूरा खाका दुनिया के सामने रख दिया है। स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवेयरनेस ट्रेनिंग (START 2026) के दौरान उन्होंने बताया कि भारत का अगला लक्ष्य चांद से सैंपल कलेक्ट करके उन्हें सुरक्षित धरती पर वापस लाना है। चंद्रयान-4 में हम सैंपल इकट्ठा करके उन्हें वापस लाने की योजना बना रहे हैं। चंद्रयान-5 में ज्यादा वजन वाला लैंडर होगा।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 में लैंडर की मिशन लाइफ सिर्फ 14 दिन थी। नारायणन ने कहा, "आने वाले मिशन में हम करीब सौ दिनों की लाइफ की बात कर रहे हैं। रोवर भी भारी होगा। चंद्रयान-3 में करीब 25 किलों का रोवर था, जबकि आने वाले मिशन में लगभग 350 किलो का रोवर होगा। वीनस ऑर्बिटर मिशन जैसे इसरो के आने वाले प्रोग्राम का जिक्र करते हुए कहा हमने मार्स ऑबिटर का मिशन पहले ही पूरा कर लिया है और अब हम मार्स लैंडिय मिशन काम कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "ये कुछ ऐसे पोडेक्टि हैं जिन पर सरकार मंजूरी के लिए बात हो रही है। इसलिए सांस एरिया में बहुत दिलचस्पी है। उन्होंने कहा पीएम ने स्पेस प्रोग्राम के विजन बढ़ाया गया है और कहा, हम अभीगगनयान प्रोग्मण प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं और अपने एक्ट्रोनॉट्स को स्पेश में भेजान और सुरक्षित वापस लाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इससे साथ ही साथ हम 2040 तक उन्हें सुरक्षित वापस लाने पर काम कर रहे हैं। ब्रेनस्टॉर्मिंग एक्टिविटीज पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इसलिए स्पेस सेक्टर में कई एक्टिविटीज हो रही है।" नागरिकों के लिए फूड सिक्योंटी, वॉटर सिक्योरिटी कम्युनिकशन और सेफ्टी पक्का करने वाली एप्लीकेशन से जु़ड़ी एक्टिवटीज के अलावा सांइंस एरिया में भी कई इनिशिएटिव प्लान किए हैं।
नारायण ने भारत के अलग-अगल लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन- चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रायान-3 के बारे में बताया कि इसमें कई साइंटिफिक खोजें हुई हैं। उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता के बारे में बाताते हुए, चेयरमैन ने कहा कि भारत चांद के साउथ पोल के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बन गया है।
साल 2003 के चंद्रयान-3 मिशन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पहला ऐसा देश बना, जिसने चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की। उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ लैंडिंग ही नहीं की बल्कि कई खोज भी की। करीब 8 मिनरल्स की पहचान, सिस्मिक एक्टिविटी के बारे में स्टडी और चांद की सतह की थर्मल प्रोफाइल के बारे में समझा गया।
Created On :   12 March 2026 2:12 AM IST












