UP Elections 2026: बसपा और सपा की लड़ाई के बीच कांग्रेस ने ली एंट्री, तीनों एक ही निशाने पर चला रहे तीर

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले ही राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कांशीराम जयंती के आयोजन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था ही कि अब कांग्रेस ने भी इसमें एंट्री मार ली है। कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अब कांशीराम को लेकर हो रहे आयोजन में शामिल होंगे। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, दलित स्कॉलर्स से भी मिलकर बातचीत करेंगे। कांग्रेस राज्य में कांशीराम की जयंती को सामाजिक परिवर्तन दिवस के तौर पर मनाया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस इस कदम से दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटबैंक को साधने की कोशिश में लगी हुई है। बीते दिनों समाजवादी पार्टी ने कांशीराम जयंती को लेकर बड़े आयोजन की तैयारी की बात कही थी, जिसको लेकर बसपा चीफ मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
लोकसभा का सिक्का विधानसभा में भी चलाने के मूड में सपा
सपा कांशीराम की जयंती पीडीए दिवस के तौर पर मनाने वाली है। सपा की तरफ से हर जिले में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में दलितों के एक वर्ग से मिलने वाले समर्थन से सपा काफी ज्यादा प्रभावित हैं। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी सपा लोकसभा का ही सिक्का चलने के मूड में नजर आ रही है।
सपा के फैसले पर बीएसपी का पलटवार
सपा के इस फैसले के बाद बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने सपा की तरफ से बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने पर कहा है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का ये नाटक है। अगर वो पहले कांशीराम का सम्मान करना सीख गए होते तो, उनको आज नाटक करने की जरूरत ही नहीं होती। जब वो सीएम थे, तो उन्होंने कांशीराम की जयंती पर छुट्टी को निरस्त कर दिया था।
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तीना पार्टियों का एक निशाना
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सपा और कांग्रेस कांशीराम जयंती के दिन भले ही मंच शेयर ना करें लेकिन उनका निशाना, बसपा और बीजेपी के वोट बैंक पर डाला जा रहा है। इसके चलते ही दोनों दल 2027 के चुनाव में उतर सकते हैं। दलित और पिछड़े मतों को एकसाथ करने के लिए कांग्रेस और सपा अभी से ही काम में लगे हुए हैं। अब तक की स्थिति के मुताबिक, दोनों दल इंडिया अलायंस में रहकर ही चुनाव लड़ेंगे और सीट का बंटवारा करेंगे। पिछले आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति वर्ग के वोटर्स ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस को वोट दिया था, जो कि सपा और कांग्रेस की इंडिया अलायंस थी।
Created On :   11 March 2026 2:44 PM IST












