Delhi Excise Policy: दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अरविंद केजरीवाल ने लिखा पत्र, शराब नीति घोटाला मामले की सुनावई करने वाले जज को हटाने की मांग

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई करने वाले जज को हटाने की मांग करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लेटर लिखा है। ये जानकारी पार्टी ने सार्वजनिक रूप से शेयर की है।
यह भी पढ़े -अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के बीच प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलने की होड़ लगी है वीरेंद्र सचदेवा
आप ने पत्र में क्या कहा?
यह मामला दिल्ली की शराब नीति में कथित तौर पर घोटाले से जुड़ा हुआ है। इसको लेकर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगे हैं। लिखे गए पत्र में नेताओं ने इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई करने की बात कही है। इस पत्र में आगे वर्तमान की सुनवाई को लेकर कुछ आपत्तियां उठाई गई हैं। हालांकि, अभी तक उन आपत्तियों का जिक्र सार्वजनिक तौर पर नहीं किया गया है। वहीं, मुख्य न्यायाधीश के पास ऐसे अनुरोधों पर विचार करने के अधिकारी होते हैं। पार्टी के इस कदम से न्यायिक प्रक्रिया में एक नया मोड़ लेकर आया है।
इस मामले में दोनों नेताओं की हुई गिरफ्तारी
शराब नीति घोटाला मामले में कथित अनियमितताओं के लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों ने जांच शुरू की थी। इस दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अरेस्ट भी किया गया था। इस मामले में पूछताछ के लिए दोनों नेताओं को एजेंसियों ने बुलाया भी था। यह मामले की दिल्ली समेत पूरे देश में राजनीतिक बहस छिड़ गई थी। हालांकि, इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पूर्व सीएम समेत 23 लोगों को बरी कर दिया था। इस फैसले को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
यह भी पढ़े -दिल्ली HC के निर्देश के बाद केजरीवाल और सिसोदिया की राहत पर संकट! निचली कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, सभी आरोपियों को भेजे नोटिस
क्या थीं दिल्ली की नई शराब नीति?
दिल्ली की तत्कालीन अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नई शराब नीति लागू की थी। इसके तहत राज्य में 32 जोन बनाए गए थे, जिसमें हर एक जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकाने खुलनी थीं। अगर कुल आंकड़ों की बात करे तो प्रदेश में 849 शराब की दुकानें खुलनी थीं। इसके अलावा, प्रदेश की सभी दुकाने प्राइवेट हो जानी थी। इसके पहले तक दिल्ली में 60 प्रतिशत सरकारी और 40 फीसदी प्राइवेट शराब की दुकानें थी। नई नीति के लागू होने के बाद पूरे राज्य में 100 प्रतिशत दुकानें प्राइवेट हो गई थी। इसको लेकर सरकार ने तर्क दिया था कि इससे राज्य को 3,500 करोड़ रुपए का लाभ पहुंचेगा।
Created On :   11 March 2026 6:30 PM IST












