Turkman Gate Dispute: फैज-ए-इलाही मस्जिद के बाहर अतिक्रमण पर बुलडोजर को लेकर भारी एक्शन, जानें क्या है इसके पीछे की वजह और किसकी है जमीन?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट के पास ही स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद और उससे सटी हुई जमीन सिर्फ और सिर्फ एक स्थानीय अतिक्रमण का मामला नहीं है बल्कि इस पर भारी विवाद हो रहा है। ये केस सरकारी जमीन, वक्फ दावों और पुराने रिकॉर्ड्स और न्यायिक प्रक्रिया इन सबका संगम बना हुआ है। बता दें, ये मामला तब शुरू हुआ था जब सेव इंडिया फाउंडेशन नाम की संस्था ने सरकार से शिकायत की है। जिसमें कहा है कि तुर्कमान गेट स्थित रामलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है। साथ ही उसका इस्तेमाल शादी, बारात, पार्किंग और क्लिनिक जैसे कामों में किया जा रहा है।
शिकायत पर सरकार का क्या था एक्शन?
शिकायत पर एक्शन लेते हुए लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली नगर निगम ने मिलकर जॉइंट सर्वे किया है। जिसमें ये सामने आया है कि 2,512 वर्ग फुट एरिया पर अतिक्रमण किया है। रामलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन पर भी करीब 36 हजार वर्ग फुट तक कब्जा है।
कैसे है सरकारी जमीन?
सरकार ने साल 1952 से 1972 तक के रिकॉर्ड्स की जांच की थी। इसमें डीडीए और ऐल एंड डीओ के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। जांच के वक्त वक्फ बोर्ड के नाम कोई ट्रांसफर या अलॉटमेंट दर्ज नहीं था। सरकारी सर्वे के बाद सेव इंडिया फाउंडेशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट के क्या हैं आदेश?
इस मामले पर हाईकोर्ट की तरफ से निर्देश जारी किए गए थे कि अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं। 3 महीने में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल की जाए, लेकिन सभी पक्षों को सुनने का भी पूरा मौका दिया जाएगा।
सरकार का क्या है आखिरी फैसला?
एमसीडी का आखिरी फैसला बिल्कुल स्पष्ट रहा है कि 0.195 एकड़ से ज्यादा की जमीन पर कोई अधिकार साबित नहीं हुआ है। इस वजह से ही जमीन भारत सरकार की है। इस सरकारी जमीन पर मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान के अलावा शादी, पार्किंग या कमाई से जुड़ी चीजें नहीं चल सकती हैं।
Created On :   7 Jan 2026 4:52 PM IST












