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लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस में धर्म के नाम पर अपमान, पासपोर्ट अधीक्षक का तबादला 

June 22nd, 2018 10:17 IST

हाईलाइट

  • पासपोर्ट अधीक्षक पर धर्म को लेकर अपमान करने का आरोप
  • पासपोर्ट बनवाने पति-पत्नी ने लगाया आरोप
  • पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा का किया तबादला

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तप्रदेश की राजधानी लखनऊ के पासपोर्ट सेवा केन्द्र में पासपोर्ट बनवाने के लिए पति-पत्नी ने पासपोर्ट अधीक्षक पर धर्म के नाम पर अपमानित करने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित अनस सिद्दीक और तन्वी सेठ ने प्रधानमंत्री मोदी औऱ विदेशमंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया है। इस पूरे मामले में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा का तबादला कर दिया गया है।
 


मामले की रिपोर्ट जांच के लिए दिल्ली हेड ऑफिस भेज दी गई है। पासपोर्ट कार्यालय पहुंची तन्वी सेठ ने बताया कि उनकी शादी साल 2007 में अनस सिद्दीकी के साथ हुई थी उनकी छह साल की एक बच्ची भी है। तन्वी का आरोप है कि मैं पति के साथ पासपोर्ट बनवाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय गई थी। शुरुआती दो काउंटरों पर आवेदन प्रक्रिया शांति पूर्ण तरीके से पूरी हो गई थी, लेकिन जब हम तीसरे काउंटर पर पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्रा के पास गए तो उन्होंने हम दोनों के धर्म को लेकर सवाल पूछना शुरू कर दिया। वो हमसें ऊंची आवाज में बात करने लगे और धर्म के नाम पर अपमानित करने लगे।


तन्वी ने बताया कि विकास मिश्रा को हमारे सरनेम से अापत्ति थी। विकास ने हमसे पूछा था कि तुम्हारी शादी एक मुस्लिम से हुई है फिर तुमने अपना सरनेम क्यों नहीं बदला। तुम मुसलमान क्यों नहीं बन जाती या फिर तुम्हारे पति को हिन्दू बना लो। तन्वी ने आरोप लगाया है कि वहां मौजूद कुछ अन्य कर्मचारी भी उनकी खिल्ली उड़ाने लगे। हालांकि इस पूरे मामले की जानकारी होने पर एपीओ विजय द्विवेदी ने विभाग की ओर से माफी मांगते हुए उनसे लिखित शिकायत मांगी थी।


रीजनल पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारी पीयूष वर्मा के मुताबिक उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। हिंदू पत्नी व मुस्लिम पति के अब तक सैकड़ों पासपोर्ट बन चुके हैं। पासपोर्ट में पति-पत्नी के अलग धर्म के होने से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन पति व पत्नी का सरनेम अलग होने पर नियमानुसार आवेदक को एक सादे कागज पर लिखित घोषणा करनी होती है, जिसमें उनकी शादी व सरनेम का जिक्र जरूरी होता है। 


 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।