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कुंभ संक्रांति आज, 12 संक्रांतियों में जानें क्या है इसका महत्व

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 12th, 2018 01:21 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद यह संक्रांति सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। इसे सूर्य-कुंभ संक्रांति भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता कि कुंभ संक्राति पर ब्रम्हमुहूर्त में गंगा स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ संक्रांति का महत्व शास्त्रों में भी बताया गया है। इस वर्ष यह 12 फरवरी 2018 को है। 


सालभर में आती हैं 12 संक्रांतियां

सालभर में 12 संक्रांतियों का आगमन होता हैं प्रत्येक का अपना महत्व है,किंतु प्रत्येक में दान को श्रेष्ठ पुण्य माना गया है। इस दिन गरीबों को भोजन कराना। ब्राम्हणों को वस्त्र दान करना अति शुभ माना जाता है। हालांकि कुंभ संक्रांति का असर सर्वाधिक कुंभ राशि पर ही होता है, किंतु अन्य राशियों को भी यह परिवर्तन प्रभावित करता है।

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जीवन में नजर आते हैं लक्षण

कुंभ राशि के आगे व पीछे की राशियां भी सर्वाधिक प्रभाव में आती हैं। कई बार इसके शुभ एवं अशुभ लक्षण मानव के जीवन काल में भी देखने मिलते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेकर समस्या के अनुसार निवारण भी किया जा सकता है। 

इन पुण्य नदियों का स्नान माना गया है श्रेष्ठ

कुंभ संक्रांति पर पुण्य सलिलाओं खासकर गंगा, यमुना, गोदावरी व नर्मदा का स्नान सबसे अधिक श्रेष्ठ एवं पुण्य फलों को प्रदान करने वाला बताया गया है। इस वजह से भी मकर कुंभ सहित अन्य सक्रांतियों पर भी श्रद्धालु इन तटों पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। 

हिंदू पंचांगा का ग्यारहवां महीना
जब सूर्य कुंभ राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तब हर साल कुंभ संक्रांति मनायी जाती है। साथ ही यह हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्यारहवें महीने की शुरुआत भी मानी जाती है। यह दिन काफी शुभ माना गया है, किंतु सूर्य की स्थिति की वजह से यह हर साल परिवर्तित होता है। इस दिन सूर्य पूजा का अत्यधिक महत्व है। एेसा करने से मानव के तेज में वृद्धि हाेती है।

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