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छिंदवाड़ा: चकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा इलाज में लापरवाही की तो खैर नहीं

छिंदवाड़ा: चकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा इलाज में लापरवाही की तो खैर नहीं

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद चार मरीजों की आंखों से दिखाई देना बंद हो गया है।  आनन-फानन में मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम गुरुवार को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है। पीडि़त मरीजों के भोपाल पहुंचने पर उनसे मुलाकात करने चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ अस्पताल पहुंची थी। उन्होंने मरीजों को इस बात का आश्वासन दिलाया कि उन्हें बेहतर इलाज दिया जाएगा। उन्होंने मरीजों को आंखें ठीक कराने का भरोसा भी दिलाया। इसके पश्चात उन्होंने मेडिकल कॉलेज डीन और नेत्र विभाग के एचओडी से चर्चा कर सभी मरीजों की जरुरी जांचें व बेहतर इलाज करने निर्देश दिए।
गौरतलब है कि 25 सितम्बर को ऑपरेशन के बाद नेहरिया के 60 वर्षीय दफेलाल ढाकरिया, जामई की 54 वर्षीय रामरती बाई, उभेगांव की 60 वर्षीय कलावती बाई और बिसापुरकला निवासी 50 वर्षीय मुन्नालाल चौरे की आंखों में दिखाई देना बंद हो गया था। पीडि़तों में से दफेलाल, रामरतीबाई और कलावती बाई को गुरुवार को भोपाल भेजा गया है। चौथे मरीज मुन्नालाल चौरे के परिजनों ने उसका इलाज नागपुर के निजी अस्पताल में करा लिया है। इसके बाद उसकी आंखों में कुछ हद तक दिखाई देने लगा है।
आब्जर्वेशन में रखेंगे तीन दिन-
गांधी मेडिकल कॉलेज की नोडल अधिकारी डॉ कविता कुमार ने बताया कि तीनों मरीजों की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि एलर्जी की वजह से आंखों में दिखाई नहीं दे रहा है। तीनों मरीजों को नेत्र विशेषज्ञों की टीम ने तीन दिन तक आब्जर्वेशन में रखने का निर्णय लिया है। डॉ कविता के मुताबिक कई मामलों में ऑपरेशन के बाद आंखों में एलर्जी और सूजन के कारण आंखों में कुछ दिनों तक दिखाई नहीं देता। आई ड्राप और दवाओं की मदद से सूजन खत्म कर दी जाएगी। जिसके बाद सभी को दिखाई देने लगेगा।
डीन और नेत्र विशेषज्ञ पहुंचे बीसापुरकला-
मेडिकल कॉलेज डीन डॉ.जीबी रामटेके और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.सीएम गेडाम गुरुवार को बीसापुरकला मुन्नालाल चौरे के घर पहुंचे। टीम ने मरीज की आंखों की जांच की। चिकित्सकों के मुताबिक मुन्ना की आंखें स्वस्थ है। 30 सितम्बर को मुन्ना के परिजन नागपुर में उसका दोबारा ऑपरेशन करा चुके है।
चार सदस्यीय टीम करेगी जांच-
कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ और सिविल सर्जन द्वारा चार सदस्यीय टीम बनाई गई है। जो ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी जाने और पीडि़त को एक्सपायरी इंजेक्शन देने जैसे गंभीर मामले की जांच करेगी। टीम में सौंसर बीएमओ डॉ.शास्त्री, डॉ.अजयमोहन वर्मा, डॉ.शिखर सुराना और डॉ.रंजना टांडेकर शामिल है।
आयोग ने स्वास्थ्य कमिश्नर को जारी किया नोटिस-
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीरता से लेकर प्रकरण को संज्ञान में लिया है। आयोग के सदस्य मनोहर ममतानी और सरबजीत सिंह ने बताया कि कलावती बाई के नाती ने इस मामले की सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की है। ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी जाना गंभीर मामला है, जिसके संबंध में सीएमएचओ का कहना है कि रोशनी लाने सभी प्रयास किए जा रहे है। आयोग सदस्यों ने स्वास्थ्य कमिश्नर और सीएमएचओ को नोटिस जारी कर एक माह में पूरे मामले की जानकारी मांगी है।  
प्रभारी मंत्री ने कहा दोषियों पर होगी कार्रवाई-
जिले के प्रभारी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच के आदेश दिए है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं तीनों मरीजों को भोपाल में नेत्र विशेषज्ञों द्वारा बेहतर इलाज दिया जा रहा है।

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